निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का ज्वालामुखी फटा
एक साल
बाद
भी
आंदोलन
अडिग,
भिखारीपुर
मुख्यालय
का
घेराव,
बिजली
कर्मी
सड़कों
पर
किया
प्रदर्शन
ऊर्जा मंत्री
पर
निशाना,
सरकारी
कर्मियों
की
मेहनत
का
श्रेय
निजी
कंपनी
को
देना
चाहती
है
सरकार
सरप्लस में
निगम,
फिर
भी
निजीकरण
क्यों?
जब तक
निजीकरण
नहीं
रुकेगा,
संघर्ष
नहीं
थमेगा’
नियामक आयोग
ने
निगमों
के
खाते
में
18,925 करोड़ सरप्लस मानकर
टैरिफ
नहीं
बढ़ाया
दमन बढ़ेगा
तो
संघर्ष
और
तेज
होगा,
कृसंघर्ष
समिति
का
ऐलान
महिलाओं समेत
हजारों
कर्मियों
के
ट्रांसफर,
प्रीपेड
मीटर
लगाने
पर
भी
नाराज़गी
सुरेश गांधी
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में बिजली के
निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट)
बिल 2025 के विरोध में
चल रहा आंदोलन आज
एक वर्ष पूरा कर
गया। आंदोलन की 365वीं वर्षगांठ पर
वाराणसी में भिखारीपुर स्थित
प्रबंध निदेशक कार्यालय के बाहर हजारों
बिजली कर्मियों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन
किया। यह प्रदर्शन विद्युत
कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के
बैनर तले प्रदेश संयोजक
ई. शैलेन्द्र दुबे के नेतृत्व
में हुआ।
इस मौके पर बिजली कर्मियों ने शपथ ली, जब तक पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं होता और सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस नहीं ली जातीं, आंदोलन जारी रहेगा, चाहे कितने भी वर्ष लग जाएं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण को आगे बढ़ाने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने घाटे के गलत आंकड़े प्रस्तुत किए थे। समिति के अनुसार, यदि सरकारी बकाया और सब्सिडी की राशि निगमों को दे दी जाए तो वे घाटे में नहीं हैं। विद्युत नियामक आयोग ने
भी समिति के दावे पर मुहर लगाते हुए कहा कि 1 अप्रैल 2025 को निगमों के पास 18,925 करोड़ रुपये सरप्लस थे। इसी आधार पर इस वर्ष बिजली टैरिफ नहीं बढ़ाया गया।उत्पीड़न दर उत्पीड़न
बिजली कर्मियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए, 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों को आंदोलन समर्थन के चलते हटाया गया. फेशियल अटेंडेंस के नाम पर हजारों का वेतन महीनों रोका गया, महिलाओं सहित कई कर्मियों का मनमाना दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर, संघर्ष समिति पदाधिकारियों पर डिस्प्रोपोर्शनेट एसेट का झूठा मुकदमा, चेयरमैन की वीसी का बहिष्कार करने पर 87 विद्युत अभियंताओं को चार्जशीट, प्रमोशन रोका, मार्च 2023 आंदोलन के बाद की दमनात्मक कार्रवाइयांकृऊर्जा मंत्री के आदेश
के बाद भी वापस नहीं, वक्ताओं ने कहा कि प्रबंधन निजीकरण थोपने के लिए इस तरह के दबाव दे रहा है, पर कर्मी झुकने को तैयार नहीं।प्रीपेड मीटर का विरोध तेज
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया
कि सरकार बिजली कर्मियों व पेंशनरों की
रियायती बिजली सुविधा समाप्त करना चाहती है।
इसके लिए उनके घरों
पर जबरन प्रीपेड मीटर
लगाए जा रहे हैं।
समिति ने कहा कि
“यह उत्पीड़न का नया तरीका
है, जिसका पुरजोर विरोध जारी रहेगा।”
दमन बढ़ेगा तो संघर्ष और प्रचंड होगा : समिति का संदेश
वक्ताओं ने कहा कि
एक वर्ष से लगातार
सड़क पर उतरने के
बावजूद बिजली कर्मियों का मनोबल कम
नहीं हुआ है। समिति
का स्पष्ट संदेश, निजीकरण रुके बिना यह
आंदोलन नहीं रुकेगा, भले
कितने ही वर्ष बीत
जाएं। सभा की अध्यक्षता
ई. शैलेन्द्र दुबे और संचालन
अंकुर पाण्डेय ने किया। सभा
को ई. शैलेन्द्र दुबे,
अजय सिंह, ई. मायाशंकर तिवारी,
ओ.पी. सिंह, राजेन्द्र
सिंह, ई. पुष्पेन्द्र सिंह,
वंदना पाण्डेय, सतीश बिंद, उदयभान
दुबे, निखिलेश सिंह, जिउतलाल, राजेश सिंह, गिरीश यादव, जितेन्द्र यादव, रामाशीष सिंह, कृष्णा सिंह, रामकुमार झा, सुनील कुमार,
जे.पी.एन. सिंह,
ई. सौरभ मिश्रा, निरंजन
सिंह, अनिल कुमार सहित
अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।





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