Wednesday, 26 November 2025

निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध में आज सड़क पर उतरेंगे बिजलीकर्मी

निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल के विरोध में आज सड़क पर उतरेंगे बिजलीकर्मी 

बिजली सार्वजनिक सेवा है, इसे लाभ कमाने की वस्तु बनाना तो सामाजिक न्याय के अनुकूल है और ही अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक

सुरेश गांधी

वाराणसी. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले चल रहा बिजलीकर्मियों का आंदोलन बुधवार को निर्णायक पड़ाव पर पहुँच गया है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण तथा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में बिजलीकर्मी गुरुवार को सड़क पर उतरेंगे। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर होने वाले इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में वाराणसी के बिजलीकर्मी भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय पर दोपहर 1 बजे से होने वाले व्यापक प्रदर्शन में अभियंता, अवर अभियंता, नियमित कर्मचारी, संविदाकर्मी और तकनीकी स्टाफ बड़ी संख्या में जुटेंगे। यह विरोध इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिजलीकर्मियों का निजीकरण के खिलाफ चल रहा संघर्ष आज 364वें दिन में प्रवेश कर चुका है। संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक . शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि ठीक एक वर्ष पूर्व पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की घोषणा की थी। तब से ही पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन चल रहा है।

उन्होंने कहा कि निजीकरण तो उपभोक्ता के हित में है और ही कर्मचारियों के। इससे बिजली दरों में वृद्धि, सेवा गुणवत्ता में गिरावट और हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खड़ा होगा। उन्होंने बताया कि सभी संगठनों, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स, ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन, ऑल इंडिया पावर मेन्स फेडरेशन ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि 27 नवंबर को देशभर में बिजलीकर्मी सड़क पर उतरकर सरकार को संदेश देंगे कि बिजली जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निजीकरण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं।

होने वाले विरोध प्रदर्शन में प्रमुख मांगें होंगी, पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण तत्काल रोका जाए। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस लिया जाए। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया बंद की जाए। मजदूर विरोधी चारों श्रम संहिताएं रद्द की जाएं। किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। वाराणसी में कल हुए पूर्व-प्रदर्शन सभा को कई वरिष्ठ इंजीनियरों और पदाधिकारियों ने संबोधित किया। मंच से . मायाशंकर तिवारी, .पी. सिंह, . एस.के. सिंह, अंकुर पांडेय, ज्योति प्रकाश, सतीश बिंद, संदीप कुमार, राजेश सिंह, जयप्रकाश, योगेंद्र कुमार, धर्मेंद्र यादव, एस.के. सरोज, उदयभान दुबे, मनोज जैसवाल, मनोज यादव सहित कई वक्ताओं ने निजीकरण को देशहित जनहित के विरुद्ध बताया।

सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि बिजली सार्वजनिक सेवा है, इसे लाभ कमाने की वस्तु बनाना तो सामाजिक न्याय के अनुकूल है और ही अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक। वक्ताओं के अनुसार बिजलीकर्मियों का संघर्ष अब केवल कर्मचारियों की नौकरी बचाने का आंदोलन नहीं रहा, बल्कि यह किसानों, मजदूरों और देश के आम उपभोक्ताओं का आंदोलन बन चुका है। इसी कारण संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियनों ने भी बिजलीकर्मियों के साथ कंधा मिलाकर आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। 14 दिसंबर को दिल्ली में सभी राष्ट्रीय संगठनों की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। आज होने वाला प्रदर्शन निजीकरण विरोधी इस आंदोलन में सबसे बड़ा और निर्णायक माना जा रहा है। बिजलीकर्मियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को रद्द नहीं करती, तब तक संघर्ष रुकने वाला नहीं है। वाराणसी सहित पूरे प्रदेश में बिजलीकर्मियों का यह उफान सरकार के लिए गंभीर संदेश है कि सार्वजनिक संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने का विरोध अब जनचेतना बन चुका है।

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