इंस्टाग्राम पर ‘अजय’ बनकर झांसे में ब्याह रचाने वाले नसीम को पुलिस ने दबोचा
योगी राज
में
पहचान
छिपाकर
प्रेमजाल
बुनने
वालों
पर
बड़ी
कार्रवाई,
पहले
ऐसी
हिम्मत
कौन
करता
था!
सोशल मीडिया
पर
संगठित
साजिश
‘अजय’
बनकर
रचा
प्रेमजाल
सुरेश गांधी
वाराणसी. थाना मिर्जामुराद पुलिस ने गुरुवार को वह कर दिखाया, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। पहचान छिपाकर लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने और धर्म परिवर्तन की साजिश रचने वाले गिरोहों पर योगी सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति का असर अब जमीन पर खुलकर दिखने लगा है। इसी कड़ी में पुलिस ने इंस्टाग्राम पर ‘अजय’ बनकर हिंदू युवती को फंसाने वाले नसीम को धर दबोचाकृवही नसीम, जो अपनी असलियत छिपाकर विवाह कर चुका था और लड़की को अपने धर्म में लाना चाहता था। पहले के दौर में ऐसी शिकायतें दबा दी जाती थीं, कार्रवाई नाम की चीज नहीं होती थी, और इस तरह के लोग बेखौफ घूमते थे। पर अब मामला योगी आदित्यनाथ की कानून-व्यवस्था वाली यूपी का है, जहां अपराधी चाहे कितना भी चालाक क्यों न हो, अंत में गिरफ्तारी उसके दरवाजे पर ही दस्तक देती है।
पुलिस की गिरफ्त में
आने के बाद नसीम
ने जो स्वीकार किया,
वह चौंकाने वाला है। पेशे
से ट्रक चालक नसीम
ने कहा कि वह
इंस्टाग्राम पर फर्जी नाम
‘अजय’ का इस्तेमाल करता
था। असलियत छिपाकर वह खुद को
हिंदू युवक के रूप
में पेश करता, ताकि
लड़की को भरोसा हो
सके। बातचीत बढ़ी, दोस्ती गहरी
हुई और अंत में
धोखे से विवाह भी
कर लिया। नसीम ने साफ
कबूला, “वास्तविक नाम बताता तो
लड़की विश्वास नहीं करती, इसलिए
फर्जी पहचान बनाई... शादी के बाद
उसे अपने धर्म में
लाना चाहता था।” क्या यह
सीधा-सीधा छल नहीं?
क्या यह भोली-बालाओं
के विश्वास का क्रूरतम शोषण
नहीं?
पीड़िता से मिलने आया तो पुलिस ने दबोचा
नसीम गुरुवार को
पीड़िता से मिलने आया
था। पुलिस पहले से तैयार
थी। मुखबिर की सूचना काम
आई और उसे रखौना
के पास से गिरफ्तार
कर लिया गया। उसके
पास से मोबाइल फोन
भी बरामद हुआ, जिसके जरिये
वह यह पूरा खेल
खेल रहा था। अब
पुलिस मोबाइल की तकनीकी जांच
कर रही है कि
कहीं और कितनी लड़कियों
को उसने इसी तरीके
से संपर्क करने की कोशिश
की।
योगी शासन का सख्त संदेश : पहचान छिपाकर
धर्म परिवर्तन की कोशिश नहीं बर्दाश्त
इस मामले में
केस दर्ज किया गया
है धारा
87/64(2)/82(2)/115(2)/138 बीएनएस
तथा उप्र विधि विरुद्ध
धर्म परिवर्तन प्रतिषेध (संशोधित अधिनियम 2024) की धारा 3/5(1) के
तहत। ये धाराएं अपने
आप में बताती हैं
कि सरकार इस अपराध को
कितना गंभीर मानती है। योगी शासन
में जो अपराध पहले
“सामाजिक दबाव” या “सांप्रदायिकता का
डर” बताकर दबा दिये जाते
थे, अब उन पर
बिना झिझक कड़ी कार्रवाई
हो रही है। यह
संदेश सख्त है, “यूपी
में फर्जी पहचान बनाकर किसी लड़की की
जिंदगी से खिलवाड़ करने
की कोशिश की, तो जेल
ही अंतिम ठिकाना होगा।”
कड़ा सबक : अब यूपी में ऐसी हरकतों की कोई गुंजाइश नहीं
यह गिरफ्तारी केवल एक केस का निवारण नहीं, बल्कि एक संदेश है, यूपी की बेटियों के साथ छल, धोखा और धार्मिक जाल बिछाने वाले अब बच नहीं पाएंगे। पहचान छिपाकर फर्जी नाम से रिश्ता बनाना, विश्वास तोड़कर धर्म परिवर्तन की मंशा रखना, यह अपराध अब जितना बड़ा, कार्रवाई उससे कहीं ज्यादा सख्त है। योगी सरकार के कार्यकाल में यह बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर है, जहां अपराधी भागते नहीं, पकड़े जाते हैं; और लड़कियों की सुरक्षा सिर्फ वादा नहीं, जमीनी हकीकत है।


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