एक्टर बॉर्न नहीं होता, मेहनत से गढ़ा जाता है
बीएलएफ के मंच पर अनुपम खेर ने खोला स्मृतियों और साधना का रंगमंच
साहित्य, रंगमंच
और
जीवन,
तीनों
की
जड़ें
श्रम
में
हैं
: अनुपम
खेर
सुरेश गांधी
वाराणसी। नदेसर स्थित होटल ताज में
शुक्रवार को जब बनारस
लिटरेचर फेस्टिवल : 4 का दीप प्रज्वलन
पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात
अभिनेता अनुपम खेर के कर-कमलों से हुआ, तो
यह केवल एक औपचारिक
उद्घाटन नहीं रहा। काशी
की सांस्कृतिक फिज़ा में उस
क्षण स्मृति, संघर्ष और सृजन एक
साथ उतर आए। दीपों
का उजास मंच तक
सीमित नहीं था, वह
अनुभवों की रोशनी बनकर
सभागार में फैल गया।
बीएलएफ4 का उद्घाटन सत्र
केवल एक आयोजन नहीं
था। यह उस विचार
का उद्घोष था कि साहित्य
स्मृति है, रंगमंच साधना
है और जीवनकृनिरंतर अभ्यास।
काशी की धरती पर
जब अनुभव बोलते हैं, तो पीढ़ियां
सुनती हैं। और जब
अनुपम खेर जैसे कलाकार
अपने संघर्ष साझा करते हैं,
तो मंच केवल मंच
नहीं रहता, वह संभावनाओं का
रंगमंच बन जाता है।
स्कूल के मंच से सिनेमा तक : स्मृतियों में लौटे अनुपम खेर
जब जयचंद ने पृथ्वीराज को उठा
कर ऑडियंस में फेंक दियाअनुपम खेर ने उस
नाटक का एक दिलचस्प
और हास्य से भरपूर प्रसंग
भी साझा किया। संवाद
था, चला जा, चला
जा, तू बकवास ना
कर, तीन बार बोलना
था और हर बार
जयचंद को गिरना था।
दो बार नंदू गिर
गया। तीसरी बार दर्शकों में
बैठे उसके पिता की
आवाज़ गूंजी, अब तू गिरा
तो घर मत अइयो।
बस फिर क्या था,
नाटक ने नया मोड़
लिया। जयचंद बने नंदू ने
पृथ्वीराज चौहान बने अनुपम खेर
को उठाया और सीधे दर्शकों
में फेंक दिया। यह
किस्सा सुनते ही पूरा सभागार
ठहाकों से गूंज उठा।
प्रतिभा नहीं, परिश्रम कलाकार बनाता है
अपने वक्तव्य की
शुरुआत में अनुपम खेर
ने एक सूत्रवाक्य दिया,
एक्टर बॉर्न नहीं होता, मेहनत
से गढ़ा जाता है.
उन्होंने बच्चों से कहा कि
अभिनय केवल मंच या
कैमरे की कला नहीं,
बल्कि जीवन को गहराई
से देखने और महसूस करने
की साधना है। प्रतिभा से
अधिक जरूरी है अनुशासन, निरंतर
अभ्यास और धैर्य। सत्र
के अंत में उन्होंने
बच्चों के प्रश्नों के
उत्तर दिए, उनके साथ
तस्वीरें खिंचवाईं, और अनजाने में
ही कई भविष्य के
कलाकारों के भीतर एक
स्थायी दीप जला दिया।
काशी : साहित्य और संस्कृति की स्वाभाविक राजधानी
बीएलएफ के अध्यक्ष दीपक
मधोक ने स्वागत भाषण
में कहा कि काशी
से अधिक उपयुक्त स्थल
कोई नहीं हो सकता।
यहां धर्म, आध्यात्म, संस्कृति, संस्कार और संस्कृत का
अविरल प्रवाह है। उन्होंने मार्क
ट्वेन को उद्धृत करते
हुए कहा कि बनारस
केवल शहर नहीं, एक
जीवित सभ्यता है। उन्होंने बताया
कि इस वर्ष फेस्टिवल
में 167 सेलेब्रिटीज, एक साथ कई
मंच और हजारों श्रोता
जुड़े हैंकृजो इसे एक संगठित
सांस्कृतिक आंदोलन बनाता है। बीएलएफ के
सचिव बृजेश सिंह ने कहा
कि यह फेस्टिवल बनारस
की आनंदयुक्त संस्कृति का वाहक है।
13 देशों की प्रस्तुतियां और
50 से अधिक देशों के
दर्शक इसमें शामिल हैं। अनुमान है
कि 1 फरवरी तक लगभग एक
लाख लोग इसके साक्षी
बनेंगे। हमारा उद्देश्य वैश्विक समाज में व्याप्त
संकीर्णताओं को मिटाना है.
नेपाल, काशी : आस्था का अटूट सेतु
नेपाल से आए विशेष
अतिथि विनोद चौधरी ने कहा कि
नेपाल और काशी का
संबंध इतिहास से नहीं, आस्था
से जुड़ा है। नेपाल
में पशुपतिनाथ और काशी में
काशी विश्वनाथकृयह संबंध गॉड गिफ्टेड है।
नाटक, पुस्तक और रचनात्मकता का उत्सव
छात्रों का नाटक : ‘चोला
टाइगर्स’, उद्घाटन से पूर्व सनबीम
लहरतारा के छात्रों ने
चोला टाइगर्स : द एवेंजर्स ऑफ
सोमनाथ, का प्रभावशाली मंचन
किया। वीरता और त्याग से
भरे इस नाटक ने
सभागार में देशभक्ति का
ज्वार पैदा कर दिया।
पुस्तक विमोचन और 61 हजार बुकमार्क का विश्व रिकॉर्ड
बीएलएफ4 के मंच पर
सीआरपीएफ डीआईजी निशित कुमार की पुस्तक ‘द
बेंगलोर कॉन्सेप्ट’ का विमोचन हुआ।
इसके साथ ही 61 हजार
बुकमार्क का प्रदर्शन किया
गया, जो 70 शहरों के बच्चों द्वारा
बनाए गए थे। एशिया
बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
के समक्ष यह एक अनोखी
रचनात्मक उपलब्धि बनी।






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