लोहता में 274 करोड़ से बनेगा 60 एमएलडी एसटीपी, 13 नाले होंगे टैप—अब वरुणा में नहीं गिरेगा गंदा पानी
: सीआर
पाटिल
केंद्रीय जल
शक्ति
मंत्री
ने
किया
स्थलीय
निरीक्षण,
गंगा-वरुणा
को
प्रदूषण
मुक्त
करने
की
समयबद्ध
कार्ययोजना
पर
जोर
सुरेश गांधी
वाराणसी। गंगा और उसकी
सहायक नदियों को स्वच्छ बनाने
की दिशा में एक
और बड़ा कदम उठाया
गया है। लोहता क्षेत्र
में 274.31 करोड़ रुपये की लागत से
60 एमएलडी क्षमता का आधुनिक सीवेज
ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। इस परियोजना के
लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी
है और निर्माण का
मार्ग प्रशस्त हो गया है।
प्लांट के निर्माण के
साथ ही वरुणा नदी
में गिरने वाले 13 प्रमुख नालों को टैप किया
जाएगा, जिससे अब अशोधित मलजल
सीधे नदी में नहीं
पहुंचेगा।
नमामि गंगे के तहत बढ़ी रफ्तार
यह परियोजना नमामि
गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृत
की गई है, जिसका
उद्देश्य वरुणा नदी के पारिस्थितिकी
तंत्र को पुनर्जीवित करना
और शहरी विस्तार के
कारण बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करना
है। लोहता क्षेत्र से दुर्गा नाला
के माध्यम से गिर रहे
अशोधित सीवेज को रोकने के
लिए यह एसटीपी अत्यंत
महत्वपूर्ण माना जा रहा
है। अधिकारियों ने बताया कि
जल निगम की गंगा
प्रदूषण इकाई ने करीब
डेढ़ वर्ष पहले सर्वे
कर वर्ष 2037 तक की आबादी
को ध्यान में रखते हुए
लगभग 1780.86 करोड़ रुपये की लागत से
चार एसटीपी निर्माण का प्रस्ताव तैयार
किया था। इसी योजना
के तहत भगवानपुर में
55 एमएलडी और सूजाबाद में
7 एमएलडी क्षमता के प्लांट पर
कार्य प्रगति पर है, जबकि
लोहता का 60 एमएलडी प्लांट अब निर्णायक चरण
में पहुंच गया है।
गंगा-वरुणा प्रदूषण नियंत्रण पर फोकस
वरुणा नदी, गंगा नदी
की प्रमुख सहायक धारा है और
आदिकेशव घाट पर संगम
बनाती है। ऐसे में
इस परियोजना का प्रभाव सीधे
गंगा की निर्मलता पर
भी पड़ेगा। प्लांट बनने के बाद
शहर के उत्तरी हिस्से
का अधिकांश सीवेज शोधित होकर ही नदी
में प्रवाहित होगा। निरीक्षण के दौरान केंद्रीय
मंत्री ने भगवानपुर स्थित
55 एमएलडी एसटीपी और अस्सी नाले
के डायवर्जन कार्यों की भी समीक्षा
की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया
कि सभी कार्य गुणवत्ता
मानकों के अनुरूप निर्धारित
समय सीमा में पूरे
किए जाएं ताकि वरुणा
नदी में प्रदूषण की
समस्या स्थायी रूप से नियंत्रित
हो सके।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
मंत्री ने कहा कि
शहरी क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन
की मजबूत व्यवस्था ही नदी संरक्षण
का आधार है। परियोजना
के निर्माण में तकनीकी गुणवत्ता,
समयबद्धता और समन्वय सर्वोच्च
प्राथमिकता होनी चाहिए। निरीक्षण
के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी,
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, नगर
आयुक्त हिमांशु नागपाल, जल निगम के
अधिशासी अभियंता आशीष सिंह सहित
अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


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