रेल की रफ्तार, गंगा की धार और रोज़गार की ताकत
बजट में शिव की नगरी को विकास का त्रिशूल
दिल्ली : वाराणसी
और
वाराणसी
: सिलीगुड़ी
हाई-स्पीड
रेल
कॉरिडोर
गंगा जलमार्ग
पर
शिप
रिपेयर
इकोसिस्टम,
लॉजिस्टिक्स
को
मजबूती
सारनाथ का
विश्वस्तरीय
हेरिटेज
डेवलपमेंट
इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स
हब
की
सौगात
बीएचयू आईएमएस
अपग्रेडेशन
के
लिए
₹107.72 करोड़
तीर्थ और
टियर-2
शहरों
के
लिए
सालाना
₹5,000 करोड़ का सपोर्ट
सुरेश गांधी
वाराणसी। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य
मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत
वित्तीय वर्ष 2026 - 27 का केंद्रीय बजट
काशी के लिए विकास
की नई पटकथा लिखता
नज़र आ रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत
को आर्थिक शक्ति में बदलने की
रणनीति के साथ दुनिया
की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी को इस बजट
में विशेष प्राथमिकता दी गई है।
गौरतलब है कि यह
कर्तव्य भवन में तैयार
किया गया पहला बजट
है, जो तीन कर्तव्यों,
उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना,
लोगों को समृद्धि का
साझेदार बनाना और सबका साथ,
सबका विकास, से प्रेरित है।
मतलब साफ है बजट
में वाराणसी को केवल आस्था
का केंद्र नहीं, बल्कि रेल, नदी और
रोज़गार से संचालित विकास
मॉडल के रूप में
गढ़ने का स्पष्ट संदेश
है। अगर घोषणाएं ज़मीनी
हकीकत बनीं, तो काशी आने
वाले वर्षों में पूर्वांचल की
आर्थिक धुरी बनकर उभरेगी।
गंगा से ग्रोथ का रास्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय
क्षेत्र वाराणसी में इनलैंड वॉटरवेज़
के लिए शिप रिपेयर
इकोसिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव
बजट की सबसे अहम
घोषणाओं में शामिल है।
इससे गंगा जलमार्ग पर
कार्गो मूवमेंट को सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स
लागत में कमी और
नदी-आधारित परिवहन को नई मजबूती
मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार इससे
क्षेत्र में स्किल्ड रोज़गार
के बड़े अवसर भी
सृजित होंगे।
हाई-स्पीड रेल से बदलेगी दूरी
काशी को देश
के हाई-स्पीड रेल
कॉरिडोर विज़न में भी
खास स्थान मिला है। प्रस्तावित
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में
से दो, दिल्ली - वाराणसी
और वाराणसी - सिलीगुड़ी, को शामिल किया
गया है। इससे तेज़,
सस्टेनेबल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के साथ पूर्वांचल
का राष्ट्रीय और पूर्वोत्तर भारत
से आर्थिक जुड़ाव और मजबूत होगा।
सारनाथ : आस्था से अनुभव तक
बजट में सारनाथ
को देश की 15 प्रमुख
आर्कियोलॉजिकल साइट्स में शामिल किया
गया है। इन्हें एक्सपीरिएंशियल
कल्चरल डेस्टिनेशन के रूप में
विकसित किया जाएगा, जहां
क्यूरेटेड वॉकवे, कंज़र्वेशन लैब्स, इंटरप्रिटेशन सेंटर्स और इमर्सिव स्टोरीटेलिंग
टेक्नोलॉजी के माध्यम से
इतिहास को जीवंत किया
जाएगा। यह पहल वाराणसी
को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त
करेगी।
लॉजिस्टिक्स और स्वास्थ्य को बल
वाराणसी में इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स
हब के निर्माण से
व्यापार, उद्योग और सप्लाई चेन
को नई गति मिलेगी।
वहीं बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयु) के इंस्टीट्यूट ऑफ
मेडिकल साइंसेज के अपग्रेडेशन के
लिए ₹107.72 करोड़ का प्रावधान
स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल शिक्षा
को सुदृढ़ करेगा।
तीर्थ नगरों के लिए बड़ा सपोर्ट
बजट में तीर्थ
नगरों और टियर-2 व
टियर-3 शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को
मज़बूत करने के लिए
अगले पांच वर्षों तक
हर साल ₹5,000 करोड़ देने का
प्रस्ताव है। इससे वाराणसी
जैसे शहर धार्मिक, पर्यटन
और ट्रांसपोर्ट हब के रूप
में और विकसित होंगे।
बजट पर वाराणसी के व्यापारियों की दो टूक
राहत भी,
असंतोष
भी,
लोकल
व्यापार
के
लिए
अभी
और
सुधार
की
दरकार
हर वर्ग
का
ध्यान
रखने
का
प्रयास
: अजीत
सिंह
बग्गा
सुरेश गांधी
वाराणसी। बजट को लेकर
वाराणसी के व्यापारिक जगत
में मंथन तेज़ है।
इसी क्रम में वाराणसी
व्यापार मंडल द्वारा होटल
आरके ग्रैंड में बजट चर्चा
कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें
व्यापारियों के साथ-साथ
अधिवक्ता, डॉक्टर, प्रोफेसर, बैंकिंग और कर विशेषज्ञों
ने भी भाग लिया।
चर्चा में बजट को
लेकर समर्थन और असहमतिकृदोनों स्वर
स्पष्ट रूप से सामने
आए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते
हुए व्यापार मंडल के अध्यक्ष
अजीत सिंह बग्गा ने
बजट को संतुलित बताते
हुए कहा कि इसमें
हर वर्ग का ध्यान
रखने का प्रयास किया
गया है। उन्होंने कहा
कि छोटे व्यापारियों को
सेल्फ असेसमेंट की सुविधा, टैक्स
मामलों में जेल के
प्रावधान से राहत और
एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन जैसे
कदम व्यापार के माहौल को
भयमुक्त बनाएंगे। बजट 2026 ने उम्मीदों की
एक तस्वीर ज़रूर खींची है,
लेकिन वाराणसी के व्यापारियों का
साफ संदेश है अगर ‘वोकल
फॉर लोकल’ को सच में
मज़बूती देनी है, तो
आने वाले समय में
स्थानीय व्यापार के लिए ठोस
और व्यावहारिक फैसले अनिवार्य होंगे।
कर नियमों में राहत से बढ़ेगा भरोसा
चार्टर्ड अकाउंटेंट मुदूत जी ने कहा
कि रिटर्न भरने की तारीख
बढ़ाना और कुछ व्यावहारिक
छूट देना आम लोगों
और व्यापारियोंकृदोनों के लिए राहत
भरा है। उनके अनुसार
कर प्रणाली में लचीलापन टैक्स
अनुपालन को आसान बनाएगा
और इससे दीर्घकाल में
अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
अंतरराष्ट्रीय सोच वाला दूरगामी बजट
वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने बजट
को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि
यह केवल घरेलू आवश्यकताओं
तक सीमित नहीं है, बल्कि
अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात को ध्यान में
रखकर तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह
बजट आने वाले वर्षों
में भारत की आर्थिक
दिशा तय करने वाला
साबित हो सकता है।
अंकों में भी बंटी राय
चर्चा के दौरान प्रतिभागियों
ने बजट को 5 से
लेकर 10 अंक तक दिए।
कुल मिलाकर बजट की सराहना
भी हुई, लेकिन यह
राय भी उभरकर आई
कि लोकल व्यापार की
ज़मीनी चुनौतियों को देखते हुए
इसमें अभी और सुधार
की ज़रूरत है। कार्यक्रम में
सुनील चौरसिया, शाहिद कुरेशी, पीएनबी बैंक के जितेंद्र
वर्मा, सीए मुदूत, एडवोकेट
शशांक शेखर, एस.एस. बहल,
जय प्रकाश गुप्ता, शरद जायसवाल, राजू
वर्मा, अरविंद जायसवाल, संतोष सिंह, रमेश पांडे, प्रिया
अग्रवाल, इंद्रजीत सिंह सहित बड़ी
संख्या में व्यापारी उपस्थित
रहे।
बजट विकसित भारत की दिशा में कारगर होगा : प्रो. कृपाशंकर जायसवाल
स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी ज़रूरत : मनीष गुप्ता
सस्ता ऋणः स्थानीय बाजारों की ज़रूरत
ई-कॉमर्स बनाम पारंपरिक व्यापार
ई-कॉमर्स और
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
के बीच पारंपरिक व्यापारियों
के संरक्षण की मांग भी
ज़ोर पकड़ रही है।
व्यापार मंडल का कहना
है कि सरकार को
एक संतुलित, न्यायपूर्ण और दीर्घकालिक नीति
बनानी चाहिए, जिससे पारंपरिक बाजार भी समान अवसरों
के साथ प्रतिस्पर्धा कर
सकें और उनकी पहचान
व रोज़गार सुरक्षित रह सके। कुल
मिलाकर केंद्रीय बजट 2026दृ27 में व्यापारियों
के लिए सकारात्मक संकेत
तो हैं, लेकिन सामाजिक
सुरक्षा, जीएसटी सरलीकरण और सस्ते ऋण
जैसे मुद्दों पर अपेक्षाएं अधूरी
रह गई हैं। व्यापार
मंडल का विश्वास है
कि यदि सरकार आगामी
नीतियों और फैसलों में
इन सुझावों पर गंभीरता से
विचार करती है, तो
व्यापारी वर्ग देश की
अर्थव्यवस्था को और अधिक
मजबूती देने में निर्णायक
भूमिका निभाएगा।




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