श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में रंगभरी एकादशी की भव्य तैयारी
संकरी गलियों
में
सुव्यवस्था
पर
विशेष
जोर,
फूलों
की
होली
बनेगी
मुख्य
आकर्षण
सुरेश गांधी
वाराणसी। रंग और भक्ति
के अद्भुत संगम का प्रतीक
रंगभरी एकादशी पर्व को लेकर
काशी में तैयारियाँ अंतिम
चरण में पहुँच चुकी
हैं। इस वर्ष आयोजन
को अधिक व्यवस्थित, सांस्कृतिक
और गरिमामय बनाने के लिए व्यापक
स्तर पर प्रबंध सुदृढ़
किए गए हैं। मंदिर
प्रांगण में काशीवासियों को
अपने आराध्य महादेव की चल प्रतिमा
के साथ पारंपरिक अबीर-गुलाल की होली खेलने
हेतु आमंत्रित किया गया है,
जिससे सदियों पुरानी परंपरा का उल्लासपूर्ण स्वरूप
पुनः जीवंत होगा।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र
ने बताया कि परंपरा के
अनुसार बाबा की चल
प्रतिमा बाहर से शोभायात्रा
के रूप में मंदिर
परिसर तक लाई जाएगी।
क्षेत्र की संकरी गलियों
और बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए
पुलिस प्रशासन एवं महंत परिवार
की संयुक्त बैठक में यह
निर्णय लिया गया कि
प्रतिमा के साथ आने
वाले श्रद्धालुओं की संख्या 64 तक
सीमित रखी जाएगी, ताकि
सुरक्षा और सुव्यवस्था सुनिश्चित
हो सके।
लोकाचार और शास्त्रीय परंपरा
के अनुरूप चल प्रतिमा को
गर्भगृह में विराजमान कराया
जाएगा, जहाँ सप्तऋषि आरती
सहित अन्य वैदिक अनुष्ठान
विधिपूर्वक संपन्न होंगे। इस वर्ष आयोजन
में एक विशेष परिवर्तन
करते हुए शिवार्चनम मंच
पर अबीर-गुलाल की
बजाय केवल “फूलों की होली” का
आयोजन किया जाएगा, जिससे
कार्यक्रम की आध्यात्मिक गरिमा
और सांस्कृतिक सौंदर्य दोनों का संतुलन बना
रहे।
श्रद्धालुओं से अपील की
गई है कि वे
शालीन वेशभूषा में उपस्थित हों
तथा रात्रि 10 बजे तक चलने
वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अनुशासनपूर्वक आनंद
लें। कार्यक्रम का समापन ब्रज
के रसिक कलाकारों द्वारा
प्रस्तुत फूलों की होली से
होगा, जो काशी और
ब्रज की सांस्कृतिक एकात्मता
का सजीव प्रतीक बनेगा।
ज्ञान, परंपरा और सभ्यता की
प्राचीन नगरी काशी में
यह आयोजन केवल उत्सव नहीं,
बल्कि संस्कृति और भक्ति का
सामूहिक उत्सर्जन है। आयोजकों ने
श्रद्धालुओं से आग्रह किया
है कि वे अपने
संस्कार, शालीनता और आस्था के
साथ बाबा विश्वनाथ को
रंगों की भक्ति अर्पित
करें।

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