ब्रज से काशी पहुंचा भक्ति का दिव्य श्रृंगार, बाबा विश्वनाथ को अर्पित हुई पूजन सामग्री
महाशिवरात्रि पर
श्रीकृष्ण
जन्मस्थली
की
अनूठी
भेंट,
काशी–ब्रज
सांस्कृतिक
संबंधों
को
मिला
नया
आयाम
सुरेश गांधी
वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर
पर सनातन परंपरा की अद्भुत झलक
उस समय देखने को
मिली जब मथुरा स्थित
श्रीकृष्ण जन्मस्थली से बाबा श्री
काशी विश्वनाथ के लिए विशेष
श्रृंगार एवं पूजन सामग्री
भेंट स्वरूप अर्पित की गई। इस
आध्यात्मिक भेंट ने काशी
और ब्रज धाम के
सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों
को एक नया और
ऐतिहासिक आयाम प्रदान किया
है। यह पहल श्रद्धा,
समन्वय और सनातन संस्कृति
की अखंडता का जीवंत प्रतीक
बनकर सामने आई है।
धार्मिक विद्वानों का मानना है
कि काशी और ब्रज
धाम सनातन संस्कृति के दो प्रमुख
आध्यात्मिक स्तंभ हैं। काशी जहां
भगवान शिव की मोक्षदायिनी
नगरी के रूप में
विश्व विख्यात है, वहीं मथुरा
और ब्रजभूमि भगवान श्रीकृष्ण की लीला, प्रेम
और भक्ति की पावन धरती
मानी जाती है। इन
दोनों तीर्थों के मध्य धार्मिक
परंपराओं का यह आदान-प्रदान सनातन संस्कृति की उस मूल
भावना को साकार करता
है, जिसमें संपूर्ण भारत की आध्यात्मिक
धारा एक सूत्र में
बंधी हुई दिखाई देती
है।
यह अभिनव पहल
हरि–हर के शाश्वत
और अद्भुत संबंध को भी सजीव
रूप में प्रस्तुत करती
है। सनातन मान्यता के अनुसार भगवान
विष्णु और भगवान शिव
एक-दूसरे के पूरक माने
जाते हैं। भगवान विष्णु
जहां सृष्टि के पालनकर्ता हैं,
वहीं भगवान शिव संहार और
कल्याण के अधिष्ठाता हैं।
दोनों की उपासना और
समन्वय लोकमंगल और सृष्टि संतुलन
का आधार माना जाता
है। ऐसे में श्रीकृष्ण
जन्मस्थली से बाबा विश्वनाथ
के लिए श्रृंगार सामग्री
की भेंट इस दिव्य
एकत्व का आध्यात्मिक संदेश
लेकर आई है।
उल्लेखनीय है कि तीर्थों
के मध्य धार्मिक सांस्कृतिक
संबंधों को सुदृढ़ करने
की यह परंपरा पिछले
कुछ वर्षों में नई गति
से आगे बढ़ रही
है। गत वर्ष रंगभरी
एकादशी के अवसर पर
काशी और मथुरा के
बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की
पहल की गई थी।
इसके अतिरिक्त ‘पवित्र तीर्थ जल योजना’ के
माध्यम से काशी और
रामेश्वरम धाम के मध्य
आध्यात्मिक सेतु स्थापित करने
का प्रयास भी किया गया
है। इसी क्रम में
काशी और ब्रज धाम
के बीच यह नई
परंपरा सनातन संस्कृति के विस्तार और
एकता को मजबूत करने
की दिशा में महत्वपूर्ण
मानी जा रही है।
महाशिवरात्रि के इस पावन
अवसर पर बाबा विश्वनाथ
को अर्पित की गई यह
भेंट श्रद्धालुओं के लिए भक्ति,
समरसता और सांस्कृतिक गौरव
की अनुपम अनुभूति लेकर आई। इस
आयोजन ने न केवल
काशी और ब्रज के
मध्य धार्मिक संबंधों को प्रगाढ़ किया,
बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के
बीच सनातन संस्कृति की व्यापकता और
एकात्मता का संदेश भी
प्रसारित किया।
श्री काशी विश्वनाथ
मंदिर न्यास ने इस पावन
भेंट के लिए श्रीकृष्ण
जन्मभूमि मंदिर न्यास के प्रति आभार
व्यक्त करते हुए इसे
सनातन परंपरा के संरक्षण और
संवर्धन की महत्वपूर्ण पहल
बताया है। साथ ही
मंदिर न्यास ने भगवान शिव
और भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों को
इस आध्यात्मिक नवाचार में सहभागी बनने
पर शुभकामनाएं भी प्रेषित की
हैं।


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