काशी में पर्यटन को नया आधार: होमस्टे–बीएंडबी योजना पर मंथन, स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
कार्यशाला में
नीति-2022
के
साथ
नई
योजनाओं
की
दी
गई
विस्तृत
जानकारी,
ऑनलाइन
आवेदन
से
प्रक्रिया
हुई
आसान
सुरेश गांधी
वाराणसी. धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी
वाराणसी में पर्यटन को
नई दिशा देने की
कवायद तेज हो गई
है। इसी क्रम में
पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से
शुक्रवार को आयुक्त कार्यालय
स्थित ऑडिटोरियम में पर्यटन नीति-2022
तथा होमस्टे एवं बेड एंड
ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) स्कीम-2025 पर एक महत्वपूर्ण
कार्यशाला का आयोजन किया
गया। इस आयोजन का
उद्देश्य नई पर्यटन नीतियों
का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए स्थानीय
लोगों को इससे जोड़ना
और रोजगार के अवसरों का
विस्तार करना रहा।
कार्यक्रम में जिला पंचायत
अध्यक्ष पूनम मौर्या और
विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह मुख्य अतिथि
के रूप में उपस्थित
रहे। साथ ही वाराणसी
टूरिज्म गिल्ड और टूरिज्म वेलफेयर
एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित
बड़ी संख्या में पेइंग गेस्ट
हाउस, होमस्टे और बीएंडबी संचालकों
ने भागीदारी की। कार्यशाला में
संयुक्त निदेशक पर्यटन ने होमस्टे और
बीएंडबी योजनाओं की विस्तृत जानकारी
प्रस्तुत करते हुए बताया
कि ये योजनाएं गैर-व्यावसायिक स्वरूप की हैं, जिनका
उद्देश्य स्थानीय लोगों को पर्यटन से
जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट
किया कि होमस्टे योजना
के तहत किसी भवन
में अधिकतम 9 कमरों की अनुमति है,
जबकि बेड एंड ब्रेकफास्ट
स्कीम में अधिकतम 7 कमरे
संचालित किए जा सकते
हैं।
पर्यटन विभाग द्वारा 1 से 6 कमरों तक
के संचालन की अनुमति प्रारंभिक
रूप से 3 वर्षों के
लिए दी जाती है।
इसके बाद संचालकों को
अपनी इकाई का नवीनीकरण
कराना अनिवार्य होगा। इससे न केवल
व्यवस्था में पारदर्शिता बनी
रहेगी, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता भी
सुनिश्चित होगी। कार्यक्रम में यह भी
बताया गया कि इच्छुक
आवेदक ऑनलाइन पोर्टल up-tourismportal.in के माध्यम से
आवेदन कर सकते हैं,
जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी
हो गई है। कार्यशाला के
दौरान संचालकों ने पेइंग गेस्ट
हाउस स्कीम की वैधता अवधि
और नई नीति में
पंजीकरण को लेकर कई
सवाल उठाए। इस पर संयुक्त
निदेशक ने स्पष्ट किया
कि पहले से पंजीकृत
इकाइयों को 3 वर्ष की
अवधि पूर्ण होने के बाद
ही नई होमस्टे नीति
के अंतर्गत पंजीकरण कराना होगा। वहीं, भारत सरकार की
बीएंडबी स्कीम के तहत पहले
से पंजीकृत इकाइयों के लिए राज्य
सरकार की स्कीम में
पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
इस कार्यशाला ने
स्पष्ट कर दिया कि
वाराणसी में पर्यटन को
केवल धार्मिक दायरे तक सीमित न
रखकर अब उसे स्थानीय
अर्थव्यवस्था और रोजगार से
जोड़ने की ठोस पहल
की जा रही है।
होमस्टे और बीएंडबी जैसी
योजनाएं आने वाले समय
में काशी के पर्यटन
ढांचे को और मजबूत
करने के साथ ही
आम नागरिकों को सीधे लाभ
पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाएंगी।


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