दिनदहाड़े यूपी कालेज में खून : प्रिंसिपल के सामने चली गोलियां, बीएससी छात्र की मौत से दहली काशी
·
पुरानी रंजिश
बनी
कत्ल
की
वजह
·
8 से
अधिक
गोलियां
दागकर
फरार
हुआ
आरोपी
·
छात्रों का
उबाल,
कैंपस
में
तोड़फोड़,
गिरफ्तारी
की
मांग
·
मां की चीख
से
हर
आंखे
हुई
नम
·
बेटे की
लाश
देख
बेसुध
हुई
मां
·
आरोपी की
तलाश
में
पुलिस
की
टीमें
सुरेश गांधी
फिरहाल, काशी के शैक्षणिक
माहौल पर यह हमला
सिर्फ एक हत्या नहीं,
बल्कि सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता
का संकेत है। जिस परिसर
में भविष्य गढ़ा जाता है,
वहां गोलियों की गूंज ने
छात्रों और अभिभावकों के
मन में भय की
गहरी रेखा खींच दी
है। अब सबकी निगाहें
प्रशासन की कार्रवाई और
न्याय पर टिकी हैं।
खास यह है कि
वहां मौजूद हर जुबान पर
एक ही शब्द थे,
जो हुआ, उसने शिक्षा
के मंदिर को खौफ के
मैदान में बदल दिया
है। घटना ने न
सिर्फ कैंपस को हिला दिया,
बल्कि उस मां की
चीख ने पूरे शहर
को झकझोर दिया, जिसने अपने इकलौते बेटे
को खून से लथपथ
देखा।
प्रिंसिपल के सामने चली गोलियां, दहशत में भागे लोग
छात्रों का आरोप है
कि पूरी घटना प्रिंसिपल
के सामने हुई। फायरिंग होते
ही परिसर में अफरा-तफरी
मच गई। जो छात्र
पास थे, वे जान
बचाकर इधर-उधर भागे।
एक छात्र ने बताया कि
आवाज “बम फटने” जैसी
थी, जब बाहर निकले
तो आरोपी लगातार फायर कर रहा
था। रोकने की कोशिश पर
उसने हथियार तान दिया।
ट्रॉमा सेंटर में तोड़ा दम
गंभीर रूप से घायल
सूर्य को पहले जिला
अस्पताल और फिर बीएचयू
ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया,
जहां डॉक्टरों ने उसे मृत
घोषित कर दिया। शुरुआती
जांच में शरीर में
8 से अधिक गोलियां लगने
की पुष्टि हुई है।
मां की चीख से कांप उठा ट्रॉमा सेंटर
मौत की खबर
मिलते ही जब मां
किरन सिंह अस्पताल पहुंचीं,
तो उनकी चीत्कार ने
वहां मौजूद हर शख्स को
झकझोर दिया। “अब मैं किसके
लिए जिऊंगी...” कहते-कहते वह
बार-बार बेहोश हो
जा रही थीं। सूर्य,
जिसे घर में “पवन”
कहा जाता था, अपने
माता-पिता का इकलौता
बेटा था। पिता ऋषिदेव
सिंह बाहर थे, जबकि
मां स्थानीय स्कूल में काम करती
हैं।
कैंपस बना रणक्षेत्र, छात्रों का फूटा गुस्सा
हत्या के बाद आक्रोशित
छात्रों ने कॉलेज गेट
बंद कर दिया और
जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कुर्सियां-मेज़ तोड़ी गईं,
परिसर में तोड़फोड़ हुई।
छात्रों की मांग है
आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी,
प्रिंसिपल का इस्तीफा. कैंपस
सुरक्षा पर जवाबदेही तय
हो.
पुलिस छावनी में तब्दील कॉलेज
घटना के बाद
पूरा यूपी कॉलेज पुलिस
छावनी में बदल गया।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ
अधिकारी मौके पर पहुंचे।
आसपास के 10 थानों की फोर्स तैनात
की गई है। पुलिस
ने मौके से पिस्टल
और कारतूस बरामद कर लिए हैं।
आरोपी की गिरफ्तारी के
लिए तीन टीमें दबिश
दे रही हैं।
जांच में क्या आया सामने?
पुरानी रंजिश को लेकर विवाद,
आरोपी पहले से हथियार
लेकर आया था, फायरिंग
के बाद पिस्टल फेंककर
फरार, कॉलेज भवन की छत
से कूदकर भागने की आशंका.
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
इस सनसनीखेज वारदात
ने कॉलेज प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था
पर बड़े सवाल खड़े
कर दिए हैं, कैसे
एक छात्र हथियार लेकर कैंपस में
पहुंचा? क्यों नहीं रोकी जा
सकी फायरिंग? क्या पहले से
तनाव की जानकारी थी?
“बम जैसी आवाज आई...”आंखों देखा हाल
क्लास में मौजूद एक
छात्र ने बताया, “अचानक
तेज धमाका हुआ, लगा जैसे
बम फटा हो। बाहर
आए तो देखा कि
आरोपी लगातार गोली चला रहा
था। जब हमने रोकने
की कोशिश की तो उसने
हमारी तरफ भी पिस्टल
तान दी। डर के
कारण पीछे हटना पड़ा।”
इकलौता बेटा था सूर्य
सूर्य प्रताप सिंह, जिसे घर में “पवन” कहा जाता था, अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता ऋषिदेव सिंह बाहर थे. मां स्थानीय स्कूल में काम करती हैं. परिवार की उम्मीदों का केंद्र था सूर्य. उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। यह घटना सिर्फ एक छात्र की हत्या नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। काशी, जो ज्ञान की नगरी कही जाती है, वहां दिनदहाड़े गोलियों की गूंज और मां की चीख ने यह बता दिया कि अब खतरा सिर्फ सड़कों तक सीमित नहींकृकैंपस भी असुरक्षित होते जा रहे हैं। अब पूरा शहर एक ही सवाल पूछ रहा है क्या सूर्य को न्याय मिलेगा, और क्या ऐसे हादसे दोबारा नहीं होंगे?




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