33 फीसदी आरक्षण से बदलेगी सियासत की तस्वीर : नारी शक्ति को मिलेगा निर्णायक अधिकार
नारी शक्ति
वंदन
अधिनियम
केवल
कानून
नहीं,
बल्कि
सामाजिक
क्रांति
का
आधार
है
: डॉ.
नीरजा
माधव
विशेष अधिवेशन
(16से
18) में
लगेगी
मुहर,
संसद-विधानसभाओं
में
बढ़ेगी
महिलाओं
की
भागीदारी
महिलाओं की
भागीदारी
से
संसद
की
कार्यकुशलता
बढ़ेगी
: आनंद
प्रभा
महिला नेतृत्व
से
समाज
को
नई
दिशा
मिलेगी
: डॉ.
शिप्रा
श्रीवास्तव
महिलाओं की
भागीदारी
बढ़ेगी
तो
बेहतर
परिणाम
आएंगे
: सीए
रश्मि
केशरवानी
सरकार योजनाओं ने
महिलाओं
को
मजबूत
आधार
दिया
: डॉ.
रचना
अग्रवाल
सुरेश गांधी
वाराणसी. देश की राजनीति
एक बड़े बदलाव की
दहलीज पर खड़ी है।
जहां “नारी शक्ति” केवल
विचार नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की
वास्तविक भागीदार बनने जा रही
है। वर्ष 2023 में पारित नारी
शक्ति वंदन अधिनियम को
लागू करने की दिशा
में 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाया गया
विशेष अधिवेशन निर्णायक माना जा रहा
है। इस अधिनियम के
लागू होने के साथ
ही लोकसभा और विधानसभाओं में
महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे भारतीय लोकतंत्र में व्यापक और
क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद है।
सर्किट हाउस में आयोजित
पत्रकार वार्ता में प्रख्यात साहित्यकार
डॉ. नीरजा माधव ने कहा
कि यह कदम आधी
आबादी को उनका वास्तविक
अधिकार दिलाने वाला है। उन्होंने
कहा कि अब तक
हर क्षेत्र में अपनी क्षमता
साबित कर चुकी महिलाएं
राजनीति में भी निर्णायक
भूमिका निभाएंगी।
हर क्षेत्र में आगे, अब राजनीति में बारी
उन्होंने कहा कि आज
महिलाएं प्रशासनिक सेवाओं, सशस्त्र बलों, कॉरपोरेट जगत, शिक्षा और
साहित्य जैसे हर क्षेत्र
में अपनी क्षमता सिद्ध
कर चुकी हैं, लेकिन
राजनीति में उनकी भागीदारी
सीमित रही है। इस
कानून के लागू होने
के बाद संसद और
विधानसभाओं में महिलाओं की
सक्रिय भूमिका बढ़ेगी और नीति निर्माण
में उनका प्रत्यक्ष योगदान
दिखाई देगा।
परिसीमन और जनगणना बनीं वजह
उन्होंने स्पष्ट किया कि 2023 में
अधिनियम पारित होने के बावजूद
2024 के चुनाव में इसे लागू
न किए जाने का
कारण परिसीमन और जनगणना से
जुड़ी प्रक्रियाएं हैं। उम्मीद जताई
गई कि आगामी चुनावों
से पहले यह प्रक्रिया
पूरी कर ली जाएगी।
‘रबर स्टैंप’ बनने से बचाना होगा
डॉ. माधव ने
चेताया कि इस बदलाव
के साथ चुनौतियां भी
जुड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों
में कई बार महिला
प्रतिनिधि केवल नाममात्र की
होती हैं और निर्णय
पुरुष सदस्य लेते हैं। उन्होंने
कहा कि महिलाओं को
शिक्षा, जागरूकता और नेतृत्व कौशल
से सशक्त बनाना जरूरी है, ताकि वे
स्वतंत्र रूप से निर्णय
ले सकें और वास्तविक
नेतृत्व प्रदान कर सकें।
महिला नेतृत्व से संवेदनशील होगा शासन
उन्होंने कहा कि यदि
वैश्विक राजनीति में महिलाओं की
भागीदारी बढ़ती है, तो
निर्णयों में संवेदनशीलता, करुणा
और संतुलन बढ़ेगा। भारतीय संस्कृति में नारी को
ममता, दया और सृजन
का प्रतीक माना गया है,
जो शासन व्यवस्था को
मानवीय दिशा दे सकती
है।
महिला नेतृत्व से आएगी संवेदनशीलता
डॉ. माधव ने
कहा कि महिला नेतृत्व
से शासन में संवेदनशीलता
और संतुलन बढ़ेगा, जिससे समाज में सकारात्मक
बदलाव देखने को मिलेगा।
सरकार की पहल बनी आधार
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व
में “बेटी बचाओ, बेटी
पढ़ाओ” जैसे अभियानों ने
महिलाओं को सशक्त बनाने
की मजबूत नींव रखी है।
अब वोमेन लेड डेवलपमेंट के
जरिए महिलाएं विकास की अगुआ बन
रही हैं।
इतिहास से मिलती है प्रेरणा
रानी लक्ष्मीबाई और
रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं की
परंपरा को आज की
महिलाएं आगे बढ़ाने को
तैयार हैं। आनंद प्रभा
ने कहा, महिलाओं की
भागीदारी से संसद की
कार्यकुशलता बढ़ेगी. डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव
ने कहा, महिला नेतृत्व
से समाज को नई
दिशा मिलेगी. सीए रश्मि केशरवानी
ने कहा, महिलाओं की
भागीदारी बढ़ेगी तो बेहतर परिणाम
आएंगे. डॉ. रचना अग्रवाल
ने कहा, सरकारी योजनाओं
ने महिलाओं को मजबूत आधार
दिया. पत्रकार वार्ता का संचालन साधना
वेदांती ने किया।

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