Monday, 11 May 2026

सोमनाथ पर 17 आक्रमण हुए, लेकिन सनातन की चेतना को कोई पराजित नहीं कर सका : योगी

सोमनाथ पर 17 आक्रमण हुए, लेकिन सनातन की चेतना को कोई पराजित नहीं कर सका : योगी 

काशी से मुख्यमंत्री योगी का संदेश जो भारत की आत्मा मिटाने आए थे, इतिहास से स्वयं मिट गए

सोमनाथ स्वाभिमान पर्वमें गरजे मुख्यमंत्री, बोलेकृ काशी और सोमनाथ भारत की सांस्कृतिक चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ

सुरेश गांधी

वाराणसी। सोमनाथ पर आक्रमण हुए, मंदिर तोड़े गए, शिखर गिराए गए, लेकिन भारत की सनातन चेतना को कोई पराजित नहीं कर सका। जो भारत की आत्मा मिटाने आए थे, वे स्वयं इतिहास की धूल में खो गए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को काशी विश्वनाथ धाम में आयोजितसोमनाथ स्वाभिमान पर्वके दौरान यह उद्गार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय पुनर्जागरण के जीवंत प्रतीक हैं।

काशी विश्वनाथ धाम परिसर में आयोजितसोमनाथ संकल्प महोत्सवमें प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, आयुष राज्य मंत्री दयाशंकर दयालु, विधायक एवं पूर्व मंत्री नीलकंठ तिवारी
सौरभ श्रीवास्तव, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, महापौर अशोक तिवारी और बड़ी संख्या में संत, विद्वान एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा सेएक भारत-श्रेष्ठ भारतकी संकल्पना साकार रूप ले रही है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और अयोध्या में राम मंदिर जैसे प्रकल्प केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत वैभव और विकास की नई यात्रा पर आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा की प्रेरक शक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने भारत को उसकी सांस्कृतिक चेतना से पुनः जोड़ने का कार्य किया है।  
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ हैं। एक उत्तर में गंगा तट पर स्थित है, जिसने सनातन धर्म की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण रखा, जबकि दूसरा पश्चिमी समुद्र तट पर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर हजारों वर्षों तक खड़ा रहा। 

उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की उस अमर चेतना का प्रतीक है, जहां धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय अस्मिता एकाकार हो जाती है। इतिहास हमें सिखाता है कि सनातन संस्कृति पर आक्रमण हो सकते हैं, लेकिन उसे समाप्त नहीं किया जा सकता। विनाश क्षणिक होता है, जबकि सनातन शाश्वत है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार हमला किया। महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक अनेक शासकों ने मंदिरों को ध्वस्त कर भारत की आध्यात्मिक चेतना को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। उन्होंने कहा, “आक्रांताओं ने समझा कि मूर्तियां तोड़कर और वैभव लूटकर भारत की आत्मा को समाप्त किया जा सकता है, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सनातन केवल मंदिरों की

दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है। 
मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उल्लेख करते हुए कहा कि औरंगजेब ने यहां प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का प्रतीक खड़ा किया था, लेकिन वह भी भारत की आत्मा को नहीं तोड़ सका। आज काशी विश्वनाथ धाम पुनः दिव्य और भव्य स्वरूप में पूरी दुनिया के सामने खड़ा है।

उन्होंने कहा कि आज भी कुछ शक्तियां भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक स्वाभिमान को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहतीं।जिन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, वही मानसिकता सोमनाथ और काशी के पुनरुत्थान के खिलाफ भी दिखाई देती रही है। 
लेकिन अब भारत अपनी सांस्कृतिक अस्मिता के साथ आगे बढ़ रहा है।मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। 
अनेक चुनौतियों और विरोधों के बावजूद उन्होंने राष्ट्र की आत्मप्रतिष्ठा के रूप में इस कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 75 वर्ष पूर्व तत्कालीन विरोध के बावजूद सोमनाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उस समय कहा था कि भौतिक संरचनाओं को क्षतिग्रस्त किया जा सकता है, लेकिन भारत की आत्मा अजर, अमर और शाश्वत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की उसी शाश्वत चेतना का उत्सव है। 

यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा के पुनर्जागरण का महापर्व है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और देशभर के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की ज्योतिर्लिंग परंपरा राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का स्वागत करते हुए आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

सोमनाथ केवल पत्थरों से बना मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अमर आत्मा का स्वर है... जिसे हजार वर्षों के आक्रमण भी झुका नहीं सके। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को काशी में आयोजितसोमनाथ स्वाभिमान पर्वमें जब यह बात कही तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का इतिहास भारत की पराजय का नहीं, बल्कि पुनर्जागरण, आस्था और आत्मविश्वास का इतिहास है।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में शायद ही ऐसा कोई आयोजन देखा हो, जिसमें किसी मंदिर के हजार वर्षों के संघर्ष, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक चेतना को इतने व्यापक रूप में प्रस्तुत किया गया हो। उन्होंने गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर के पुनरुत्थान की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी वहां मंदिर के अस्तित्व पर संकट था, लेकिन आज वही सोमनाथ रोजगार, शिक्षा, संस्कृत विश्वविद्यालय और सांस्कृतिक विकास का केंद्र बन चुका है।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन गुजरात नेतृत्व और आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि से सोमनाथ का कायाकल्प संभव हुआ। 13 वर्षों तक लगातार कार्य चला और आज भी विकास की प्रक्रिया जारी है। 

सबसे बड़ी बात यह है कि वहां की जनता ने मंदिर को अपना गौरव मानकर हर त्याग किया। किसी को मकान खाली करना पड़ा तो उसने बिना विरोध के किया, क्योंकि लोगों ने समझा कि यह केवल मंदिर नहीं, हमारी अस्मिता है। राज्यपाल ने काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार सोमनाथ का पुनरुत्थान हुआ, उसी प्रकार काशी में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलकर एक ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यह समझाना होगा कि विरासत को केवल संरक्षित नहीं करना, बल्कि उसे समयानुकूल विकसित भी करना है। 

उन्होंने कहा कि सोमनाथ और काशी भारत की सनातन चेतना के दो अमर स्वर हैं। एक ने अरब सागर की लहरों के बीच आस्था का दीप जलाए रखा, तो दूसरे ने गंगा की धारा के साथ मोक्ष और अध्यात्म का संदेश पूरी दुनिया को दिया।

राज्यपाल ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महमूद गजनवी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब तक अनेक आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने और उसकी पहचान मिटाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार मंदिर उसी तेज, उसी दिव्यता और उसी आत्मविश्वास के साथ पुनः खड़ा हो गया। 

उन्होंने कहा, आक्रमणकारी तलवारें समय के गर्त में खो जाती हैं, लेकिन संस्कृति की चेतना अमर रहती है। सोमनाथ हमें सिखाता है कि विनाश क्षणभंगुर होता है, जबकि सनातन शाश्वत है। राज्यपाल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक संसाधनों या तकनीकी प्रगति में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों में निहित होती है। जो समाज अपनी विरासत से जुड़ा रहता है, वही दीर्घकाल तक जीवंत और शक्तिशाली बना रहता है।

उन्होंने कहा कि भारत ने हजारों वर्षों के आक्रमण, राजनीतिक परिवर्तनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपनी आत्मा को जीवित रखा है। यहां की संस्कृति केवल स्मृति नहीं, बल्कि जीवन मूल्य है। आश्रम व्यवस्था, वेद, पुराण, संत परंपरा और अध्यात्म आज भी भारत की जीवंत शक्ति हैं। 

राज्यपाल ने कहा कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।जो समाज अपनी जड़ों से कट जाता है, वह अंततः दिशाहीन हो जाता है। लेकिन जो अपनी सांस्कृतिक चेतना को संजोकर आगे बढ़ता है, वही स्थायी विकास करता है। उन्होंने राम, बुद्ध, कबीर और महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता ने हमेशा मानवता, संवाद, करुणा और विश्वास का संदेश दिया है।हमारी परंपरा विजय को विनाश नहीं, बल्कि विश्वास मानती है। राम मर्यादा सिखाते हैं, बुद्ध करुणा का मार्ग दिखाते हैं, कबीर मनुष्य को मनुष्य से जोड़ते हैं और गांधी सत्य अहिंसा की शक्ति बताते हैं। समारोह के अंत में राज्यपाल ने आयोजन समिति को भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान का महायज्ञ है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों को शुभकामनाएं देते हुएजय हिंदके उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

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