Saturday, 9 May 2026

राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड निस्तारण : 4.72 लाख वादों का समाधान, 20.49 करोड़ की वसूली

राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड निस्तारण : 4.72 लाख वादों का समाधान, 20.49 करोड़ की वसूली 

जिला जज बोले : लोक अदालत समाज और परिवार को जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम

आपसी समझौते से सुलझे पारिवारिक और राजस्व विवाद

न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ घटाने में मिली बड़ी सफलता

सुरेश गांधी

वाराणसी। न्याय को आसान, सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर बड़ी सफलता दर्ज की। दीवानी न्यायालय परिसर में आयोजित चालू वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय और प्रशासनिक विभागों को मिलाकर कुल 4,72,161 वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान 20 करोड़ 49 लाख 41 हजार 94 रुपये से अधिक की धनराशि की वसूली और समझौते पर सहमति बनी।

राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत भारत की प्राचीन परंपरा का आधुनिक स्वरूप है। सदियों से समाज में पंचायत और आपसी संवाद के माध्यम से विवादों को सुलझाने की परंपरा रही है, जिसे 1987 के अधिनियम द्वारा विधिक मान्यता प्रदान की गई।

जिला जज ने कहा कि लोक अदालत ऐसा मंच बन चुका है, जहां बिना समय गंवाए गंभीर से गंभीर मामलों का समाधान संभव हो पा रहा है। उन्होंने पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और न्यायालय का वास्तविक उद्देश्य परिवारों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति और संवाद से विवादों का समाधान समाज में समरसता और सौहार्द को मजबूत करता है। लोक अदालतें न केवल लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम कर रही हैं।

जनपद न्यायालय में 33 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायालय में कुल 33,807 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में लगभग 2 करोड़ 96 लाख 86 हजार 619 रुपये की धनराशि की वसूली की गई। वहीं प्रशासन एवं अन्य विभागों द्वारा 4,38,354 मामलों का निस्तारण किया गया, जिनमें 17 करोड़ 52 लाख 54 हजार 475 रुपये की वसूली हेतु समझौता हुआ। यदि दोनों आंकड़ों को मिलाया जाए तो कुल 4 लाख 72 हजार 161 मामलों का समाधान कर 20 करोड़ 49 लाख 41 हजार 94 रुपये से अधिक की धनराशि के निस्तारण पर सहमति बनी।

न्यायिक अधिकारियों और बैंकों की रही अहम भूमिका

कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय अनिरुद्ध कुमार तिवारी, मोटर दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रामकेश, बनारस बार अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ला, सेन्ट्रल बार अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम, अपर जिला जज एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी आलोक कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी अजीत कुमार, यूनियन बैंक के एलडीएम अविनाश अग्रवाल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव राजीव मुकुल पांडेय तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जीएम बीएन सिंह सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और बैंक कर्मी उपस्थित रहे।

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