शनि जयंती पर काशी हुई शनिमय, मंदिरों में दिनभर उमड़ी आस्था की भीड़
हनुमान मंदिरों
और
शनि
धामों
में
विशेष
पूजा-अर्चना,
रुद्राभिषेक
और
वैदिक
मंत्रोच्चार
के
बीच
भक्तों
ने
मांगा
सुख-समृद्धि
का
आशीर्वाद
सुरेश गांधी
वाराणसी। धर्म और अध्यात्म
की नगरी काशी में
शनिवार को शनि जयंती
के पावन अवसर पर
श्रद्धा और आस्था का
अद्भुत संगम देखने को
मिला। शहर के प्रमुख
शनि मंदिरों और हनुमान मंदिरों
में तड़के सुबह से ही
श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
लगनी शुरू हो गईं।
पूरे दिन पूजा-अर्चना,
रुद्राभिषेक, हवन और विशेष
अनुष्ठानों का दौर चलता
रहा। मंदिर परिसरों में "जय शनिदेव" और
"जय बजरंगबली" के जयघोष से
वातावरण भक्तिमय बना रहा। 
श्री काशी विश्वनाथ
मंदिर परिसर स्थित नवग्रह मंडप में विराजमान
भगवान शनि को समर्पित
शिवलिंग का विशेष रुद्राभिषेक
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न
कराया गया। पुरोहितों ने
विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान शनि
की कृपा से समस्त
जनकल्याण, सुख-समृद्धि और
मंगलकामना की प्रार्थना की।
इसके साथ ही मंदिर
परिसर में स्थापित भगवान
शनि की प्रतिमा का
भी विशेष श्रृंगार और पूजन किया
गया।
दिनभर मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रमुख मंदिरों में विशेष प्रबंध किए गए थे। शाम के समय आरती के दौरान मंदिर परिसर दीपों और श्रद्धा के प्रकाश से जगमगा उठे। काशी में शनि जयंती का पर्व केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सनातन संस्कृति के जीवंत स्वरूप का भी प्रतीक बनकर सामने आया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाया।


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