जुबां-जुबां पर ‘जगन्नाथ चक्का नैन’... भक्ति की ऐसी लहर कि गली से मंच तक गूंज रहा एक ही स्वर
रील्स, कथा
मंच,
भजन
संध्या
और
सोशल
मीडिया
पर
छाया
गीत;
हर
कलाकार
गुनगुना
रहा,
लेकिन
इसके
असली
रचनाकार
को
लेकर
भी
चर्चा
तेज
एक धुन,
कई
देवता:
‘जगन्नाथ’
से
‘हनुमान’
और
‘महाकाल’
तक,
भक्ति
की
नई
वायरल
लहर
सोशल मीडिया
पर
छाया
एक
सुर,
लेकिन
असली
सवाल
— धुन
किसकी
और
पहचान
किसकी?
सुरेश गांधी
वाराणसी। आजकल सोशल मीडिया की
दुनिया में एक भजन
अचानक ऐसी आध्यात्मिक लहर
बन गया है, जिसे
बच्चे, युवा, बुजुर्ग, कथावाचक, भजन गायक और
कलाकार तक गुनगुनाते नजर
आ रहे हैं— “जगन्नाथ
जगन्नाथ, चक्का नैन नीलाचल वारे,
तू न संभाले तो
हमें कौन संभाले…”।
यह सिर्फ एक गीत नहीं,
बल्कि शरणागति और भक्ति का
भाव बनकर लोगों के
दिलों में उतर रहा
है। इंस्टाग्राम रील्स से लेकर यूट्यूब
शॉर्ट्स, कथा पंडालों से
लेकर धार्मिक आयोजनों तक इसकी गूंज
सुनाई दे रही है।
इस भजन की
लोकप्रियता की सबसे बड़ी
वजह इसका सीधा भाव
है। इसमें भक्त स्वयं को
भगवान के चरणों में
समर्पित करता दिखाई देता
है— “मेरी ये नैया
अब तेरे हवाले…”।
यही भाव लोगों को
अपनी जिंदगी से जुड़ा हुआ
महसूस करा रहा है। लेकिन
इस बीच एक सवाल
भी तेजी से उठ
रहा है— आखिर इस
गीत का असली गायक
कौन है? सोशल मीडिया
पर कई कलाकारों ने
इसे अपनी आवाज दी
है। कहीं इसे भजन
गायक गा रहे हैं
तो कहीं कथा मंचों
पर इसकी प्रस्तुति हो
रही है। कई वायरल
वीडियो इसे इंद्रेश उपाध्याय
से जोड़ते हैं और इसी
स्वरूप ने इसे व्यापक
पहचान दिलाई। कई संगीत प्लेटफॉर्म
पर गीत के क्रेडिट
भी उनके नाम से
जुड़े दिखाई देते हैं।
हालांकि यहां एक दिलचस्प
पहलू भी है। उपलब्ध
जानकारियों के अनुसार “जगन्नाथ
चका नैन” एक पारंपरिक
भक्ति भाव से जुड़ा
पद माना जा रहा
है, जिसके अलग-अलग संस्करण
समय-समय पर सामने
आए हैं। कुछ संस्करणों
में इसे पारंपरिक रचना
बताया गया है, जबकि
कई नए संगीतकारों और
गायकों ने इसे नए
संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत
किया है। दरअसल,
यह पहली बार नहीं
है जब कोई भक्ति
गीत अचानक जन-जन की
आवाज बन गया हो।
इससे पहले राम आएंगे,
अच्युतम केशवम और हर हर
शंभू जैसे गीतों ने
भी ऐसी ही लोकप्रियता
हासिल की थी। फर्क
सिर्फ इतना है कि
“जगन्नाथ चक्का नैन” ने लोगों
के भीतर छिपे उस
भाव को छुआ है,
जिसमें संकट के समय
इंसान किसी बड़े सहारे
की तलाश करता है।
शायद यही कारण
है कि आज हर
मंच पर एक ही
आवाज सुनाई दे रही है—
"तू न संभाले तो
हमें कौन संभाले..." और
यही एक पंक्ति इस
गीत को वायरल ट्रेंड
से आगे ले जाकर
आस्था का स्वर बना
रही है। अभी सोशल
मीडिया पर एक ही
धुन पर कई भक्ति
संस्करण चल रहे हैं
— “जगन्नाथ…”, “हनुमान…”, “महाकाल…”। वाराणसी के
संकट मोचन संगीत समारोह
में “हनुमान हनुमान राम के प्यारे,
तू न संभाले तो
मुझे कौन संभाले” और
फिर “महाकाल महाकाल…” भारतीय भजन परंपरा में
अक्सर एक लोकप्रिय धुन
(ट्यून/मीटर) पर अलग-अलग
देवी-देवताओं के नाम जोड़कर
नए पद गाए जाते
हैं। जैसे एक ही
तर्ज पर राम, कृष्ण,
शिव, हनुमान, जगन्नाथ संस्करण बनने लगते हैं।
इसका अर्थ हमेशा यह
नहीं होता कि जिसने
बाद में गाया वही
मूल रचनाकार भी है।
“जगन्नाथ चका नैन” का वायरल संस्करण — बड़े पैमाने पर इंद्रेश जी महाराज के नाम से प्रसारित हो रहा है। “हनुमान…” और “महाकाल…” वाले संस्करण — संभव है कि वे उसी धुन पर मंचीय या स्वतंत्र प्रस्तुतियां हों। खास यह है कि इस गाने को नुरुला जसप्रीत ने संकट मोचन मंदिर में गाकर लोगों का दिल जीत लिया, जबकि अनुप जलोटा ने भी बड़े ही सधे अंदाज में इसे प्रस्तुत किया.

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