Wednesday, 15 July 2026

सिर्फ सड़क नहीं, काशी के अगले सौ वर्षों का नक्शा दो एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी शहर की दिशा और दशा

सिर्फ सड़क नहीं, काशी के अगले सौ वर्षों का नक्शा दो एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी शहर की दिशा और दशा 

मंडलायुक्त बोले - जाम, प्रदूषण और अव्यवस्थित यातायात होगा अतीत; गंगा-वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर से बनेगा नए बनारस का ब्लूप्रिंट

46.039 किमी गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और 43.218 किमी वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी 3 से 5 वर्ष में पूरा करने का लक्ष्यकाशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और रिंग रोड को मिलेगी निर्बाध हाई-स्पीड कनेक्टिविटी

सुरेश गांधी

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने बुधवार को विस्तृत प्रस्तुतीकरण के साथ दोनों परियोजनाओं की रूपरेखा सार्वजनिक की। उन्होंने कहा कि यह केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि अगले 40-50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया वाराणसी का नया शहरी मास्टर प्लान है। दोनों परियोजनाओं पर 25,445.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे और लगभग 89.257 किमी का एलिवेटेड नेटवर्क तैयार होगा, जो वाराणसी को जाम से स्थायी राहत देने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और भविष्य के शहरी विस्तार का आधार बनेगा।

मंडलायुक्त ने कहा कि वाराणसी विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक नगरी है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु, पर्यटक और तीर्थयात्री यहां पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों से काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद अब शहर के परिवहन ढांचे में भी ऐतिहासिक परिवर्तन होने जा रहा है। बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और धार्मिक आयोजनों के दबाव को देखते हुए आने वाले दशकों की जरूरतों के अनुरूप यह परियोजना तैयार की गई है।

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग का नमूना

राजलिंगम ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) से वाराणसी रिंग रोड तक लगभग 46.039 किलोमीटर लंबा छह लेन गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत 14,447.64 करोड़ रुपये है। परियोजना में कई अत्याधुनिक इंजीनियरिंग संरचनाएं शामिल हैं। इनमें गंगा नदी पर लगभग 910 मीटर लंबा केबल-स्टे सिग्नेचर ब्रिज, करीब 1.32 किलोमीटर लंबा स्टील बॉक्स गर्डर फ्लाईओवर, बहुस्तरीय इंटरचेंज, रैंप, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था तथा अत्याधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। उन्होंने बताया कि परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य काशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट, गंगा घाटों, बीएचयू, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, कैंट स्टेशन, बनारस स्टेशन, दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित करना है।

60 मिनट का सफर घटकर 20-25 मिनट

मंडलायुक्त के अनुसार वर्तमान में शहर के विभिन्न हिस्सों से काशी विश्वनाथ धाम और गंगा घाट तक पहुंचने में कई बार एक घंटे तक का समय लग जाता है। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद यह समय घटकर 20 से 25 मिनट रह जाएगा। इससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब सावन, देव दीपावली, महाशिवरात्रि या अन्य बड़े आयोजनों में लाखों श्रद्धालु आएंगे तो उन्हें शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर से उतरकर सीधे धाम क्षेत्र तक पहुंचने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर से बदलेगी शहर की धड़कन

राजलिंगम ने बताया कि 43.218 किलोमीटर लंबा वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर एनएच-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा। इसकी लागत 10,998.32 करोड़ रुपये होगी। यह 6/4 लेन का हाइब्रिड एलिवेटेड कॉरिडोर होगा। उन्होंने कहा कि डिजाइन इस प्रकार तैयार की गई है कि न्यूनतम भूमि अधिग्रहण और न्यूनतम विस्थापन हो। जहां तक संभव हुआ है, मौजूदा संरचनाओं को बचाते हुए मार्ग तय किया गया है। कई स्थानों पर नदी के समानांतर एलिवेटेड मार्ग बनाया जाएगा ताकि आबादी वाले क्षेत्रों पर कम से कम प्रभाव पड़े।

गंगा पार भी विकसित होगा नया शहरी क्षेत्र

मंडलायुक्त ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल ट्रैफिक कम करना नहीं है। गंगा के उस पार और वरुणा किनारे भविष्य में विकसित होने वाले नए शहरी क्षेत्रों को भी ध्यान में रखकर कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। जहां-जहां भविष्य में आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत विकास होगा, वहां एलिवेटेड कॉरिडोर से कनेक्टिविटी उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि "आज हम केवल वर्तमान की समस्या का समाधान नहीं कर रहे, बल्कि अगले कई दशकों के बनारस की नींव रख रहे हैं।"

ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी

मंडलायुक्त ने बताया कि दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर वाहनों की औसत गति बढ़ेगी। बार-बार रुकने और जाम में फंसने से होने वाली ईंधन की बर्बादी कम होगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रतिवर्ष एक करोड़ लीटर से अधिक ईंधन की बचत होगी तथा कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

आपातकालीन सेवाओं को मिलेगा लाभ

उन्होंने कहा कि शहर में एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया समय (रिस्पॉन्स टाइम) भी काफी कम होगा। मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाने में आसानी होगी और आपदा प्रबंधन अधिक प्रभावी बन सकेगा।

तीन से पांच वर्ष में पूरा करने की तैयारी

राजलिंगम ने बताया कि दोनों परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को लगभग तीन वर्ष तथा गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर को चार से पांच वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य के दौरान शहर में यातायात बाधित हो, इसके लिए भी अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी।

'विकसित भारत-2047' का महत्वपूर्ण अध्याय

मंडलायुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के संकल्प में वाराणसी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। गंगा और वरुणा के दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर केवल सड़क परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि यह काशी को विश्वस्तरीय, सुरक्षित, सुगम और आधुनिक महानगर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा, "विरासत हमारी पहचान है, लेकिन आधुनिक सुविधाएं भविष्य की आवश्यकता हैं। इन दोनों का संतुलन ही नए बनारस की पहचान बनेगा।"

दोनों परियोजनाएं एक नजर में

परियोजना

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर

वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर

लंबाई

46.039 किमी

43.218 किमी

लागत

₹14,447.64 करोड़

₹10,998.32 करोड़

कुल लागत - ₹25,445.96 करोड़

कुल लंबाई - 89.257 किमी

लक्ष्य - जाम से मुक्ति, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, पर्यटन आर्थिक विकास

समयसीमा

3 से 5 वर्ष (चरणबद्ध)

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