Wednesday, 29 July 2026

काशी में गुरु वंदना का महापर्व: मठ, मंदिर और आश्रमों में उमड़ी श्रद्धा

काशी में गुरु वंदना का महापर्व: मठ, मंदिर और आश्रमों में उमड़ी श्रद्धा 

वेदपाठ, चरण पूजन, भंडारे और सत्संग से दिनभर गूंजती रही धर्मनगरी

सुरेश गांधी

वाराणसी. गुरु पूर्णिमा पर बुधवार को काशी की आध्यात्मिक धड़कन अपने चरम पर रही। भोर की पहली आरती के साथ ही मठों, मंदिरों और आश्रमों के कपाट खुले और गुरु वंदना का महापर्व आरंभ हो गया। गंगा तट से लेकर शहर के प्राचीन अखाड़ों तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। वेदपाठ, चरण पूजन, भजन-कीर्तन, सत्संग और भंडारों ने पूरी काशी को आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया। सबसे अधिक श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ धाम, कालभैरव मंदिर, संकटमोचन मंदिर, दुर्गाकुंड, तुलसी मानस मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर में पहुंचे। 

मंदिरों में विशेष श्रृंगार किया गया और गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रवचन हुए। संकटमोचन परिसर में सुंदरकांड पाठ और सामूहिक हनुमान चालीसा का आयोजन देर शाम तक चलता रहा। काशी विश्वनाथ मंदिर में भव्य एवं विशेष आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ का दिव्य श्रृंगार कर उन्हें राजसी पोशाक धारण कराई गई। मंदिर परिसर में देर रात तक दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा।

गढ़वाघाट स्थित संतमत पीठ पर गुरु स्वामी सरनानंद जी महाराज के दर्शन हेतु सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। पूरा आश्रम क्षेत्र भक्ति, अनुशासन और अध्यात्म से सराबोर रहा। भक्तों ने उनके श्रीचरणों में वंदन कर पादुका पूजन किया। भजनों की मधुर ध्वनि और मंत्रोच्चार से आश्रम गूंज उठा। कबीरचौरा मठ में संत कबीर की वाणी का अखंड पाठ हुआ। सारनाथ स्थित बौद्ध विहारों में भी गुरु पूर्णिमा को धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस के रूप में मनाया गया। सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर में विशेष गुरु पूजन और कीर्तन हुआ। संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर समरसता संकल्प के साथ श्रद्धालुओं ने सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। मंदिर परिसर में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

जंगमबाड़ी मठ, निर्वाणी अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, दशनाम संन्यासी आश्रम, रामानुज एवं वैष्णव मठों में शिष्यों ने अपने गुरुओं का पाद पूजन कर आशीर्वाद लिया। अस्सी, तुलसी और पंचगंगा घाट पर सुबह से ही साधु-संतों की मंडलियां जुटीं। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं का तिलक कर चरण स्पर्श किया। शाम को दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती में गुरु पूर्णिमा की विशेष आरती उतारी गई, जिसमें देशभर से आए श्रद्धालु शामिल हुए।

गुरु पूर्णिमा की इस संध्या पर काशी ने एक बार फिर अपनी सनातन पहचान को जीवंत किया। मंदिरों की घंटियां, वेदों की ऋचाएं, संतों के उपदेश और गंगा की लहरों के बीच धर्मनगरी ने यह संदेश दिया कि गुरु केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को प्रकाश देने वाली शाश्वत चेतना हैं। “गुरु वह भगवंत प्रसाद हैं, जिन्हें प्राप्त कर जीवन धन्य हो जाता है। गुरु ही जागरण के द्वार खोलते हैं और आचरण को धर्ममय बनाते हैं। ईश्वर तक पहुंचने का पथ गुरु ही दिखाता है। उन्होंने युवाओं से संयम, सेवा और साधना को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम में सतुआ बाबा रणछोड़ दास और षष्ठपीठाधीश्वर यमुनाचार्य महाराज की चरण पादुकाओं का विशेष पूजन हुआ। महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा  गुरु जीवन जीने की दिशा देते हैं। शांति, भाईचारा और परिवार में सुख-समृद्धि का मार्ग सनातन धर्म ही सिखाता है। बाबा कीनाराम स्थली क्रींकुंड शिवाला में प्रातः आरती, श्रमदान और अघोरेश्वर की समाधियों का पूजन हुआ, जबकि पड़ाव स्थित अवधूत भगवान राम आश्रम में पीठाधीश्वर गुरु पद संभव राम का विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।

No comments:

Post a Comment

काली घटा, मीठी कजरी और झूमता सावन

काली घटा, मीठी कजरी और झूमता सावन   जब आकाश पर सावन की पहली बदरी उतरती है, तब केवल मौसम नहीं बदलता, भारतीय मानस की धड़कन भी बदल जाती है। म...