Tuesday, 18 August 2026

गंगा महोत्सव से देव दीपावली तक सजेगी काशी, घाटों पर संस्कृति और आस्था का महासंगम

गंगा महोत्सव से देव दीपावली तक सजेगी काशी, घाटों पर संस्कृति और आस्था का महासंगम

चार दिन संस्कृति का उत्सव, पांचवें दिन दीपों की रोशनी

20 से 23 नवंबर तक गंगा महोत्सव, 24 को देव दीपावली का दिव्य उत्सव, घाट होंगे रोशन, तैयारी तेज   

राजघाट बनेगा मुख्य मंचनमो घाट पर भी होंगे आयोजन

स्थानीय कलाकारों और काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव की प्रतिभाओं को मिलेगा मौका

सुरेश गांधी

वाराणसी। काशी की पहचान केवल उसके प्राचीन घाटों, मंदिरों और गलियों से नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना से है जो गंगा की लहरों के साथ सदियों से बहती आई है। इसी जीवंत परंपरा को एक बार फिर देश-दुनिया के सामने भव्य रूप में उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। नवंबर में गंगा महोत्सव और देव दीपावली के दौरान काशी के घाट संस्कृति, संगीत, कला और आध्यात्मिकता के विराट मंच में तब्दील होंगे। 20 से 23 नवंबर तक गंगा महोत्सव और 24 नवंबर को देव दीपावली का आयोजन प्रस्तावित है। राजघाट पर गंगा महोत्सव का प्रमुख कार्यक्रम होगा, जबकि नमो घाट और राजघाट पर अन्य सांस्कृतिक आयोजन होंगे।

गंगा महोत्सव एवं देव दीपावली की तैयारियों को लेकर मंगलवार को मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में बैठक हुई। मंडलायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आयोजन को केवल भव्यता तक सीमित रखते हुए काशी की आत्मा से जोड़कर प्रस्तुत किया जाए। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा, सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। मतलब साफ हैकाशी में नवंबर की शामें इस बार केवल दीपों से नहीं, बल्कि गंगा की लहरों पर उतरती संस्कृति, सुरों और आध्यात्मिक आभा से भी जगमगाने की तैयारी में हैं।

काशी के कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच

बैठक में मंडलायुक्त ने विशेष जोर देते हुए कहा कि इन आयोजनों में स्थानीय कलाकारों और काशी की सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रमुखता दी जाए। जनप्रतिनिधियों से संवाद कर स्थानीय कलाकारों की जानकारी जुटाने तथा उनके साथ काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव के विजयी प्रतिभागियों और राजघाट के समीप संचालित गुरुकुल के विद्यार्थियों को भी कार्यक्रमों में उचित अवसर देने को कहा गया। इससे गंगा महोत्सव केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण नहीं, बल्कि काशी की अपनी प्रतिभाओं के लिए भी बड़ा मंच बनेगा।

घाटों पर उतरेगी लोकल कला, ओडीओपी को भी बढ़ावा

काशी की कला और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया के सामने पहुंचाने के लिए प्रमुख घाटों और होटलों पर ओडीओपी उत्पादों समेत स्थानीय उत्पादों के स्टॉल लगाने के निर्देश दिए गए। उद्देश्य यह है कि उत्सव की रोशनी में काशी की सांस्कृतिक विरासत के साथ यहां के शिल्प और हुनर को भी बाजार मिले।

सफाई से सुरक्षा तक, हर मोर्चे की समीक्षा

बैठक में घाटों की साफ-सफाई, प्रकाश एवं सजावट, गंगा घाटों पर सुरक्षा, यातायात और पार्किंग, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं, अग्निशमन तथा पर्यटकों की सुविधा से जुड़ी तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा हुई। मंडलायुक्त ने नगर निगम को निर्देश दिया कि घाटों पर जमा सिल्ट की सफाई आयोजन से काफी पहले पूरी करा ली जाए, ताकि महोत्सव के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था रहे। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समयसीमा में तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। भीड़ के संभावित दबाव को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल, सुरक्षा इंतजाम और यातायात प्रबंधन को पहले से मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

गंगा-जमुनी तहजीब की झलक बनेगी उत्सव की पहचान

मंडलायुक्त ने कहा कि गंगा महोत्सव और देव दीपावली के दौरान वाराणसी की गंगा-जमुनी संस्कृति, कला, संगीत और आध्यात्मिक परंपरा को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया जाए। काशी के घाटों पर जलते दीपों की असंख्य कतारों के बीच जब संगीत, लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां गूंजेंगी तो यह आयोजन काशी की उस विरासत को विश्व पटल पर रेखांकित करेगा, जिसमें परंपरा और आधुनिकता एक साथ कदमताल करती हैं। बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार, डीसीपी ट्रैफिक अनिल कुमार यादव, वीडीए सचिव वेद प्रकाश, एडीएम सिटी राजेश कुमार, एडीएम प्रोटोकॉल विनय सिंह सहित पर्यटन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और गंगा घाट समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग की तैयारियों की जानकारी दी। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती जाए। 

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