Thursday, 22 October 2026

गंगा की लहरों के ऊपर आसमान से संवाद, सूर्यकिरण के शौर्य को सलाम!

गंगा की लहरों के ऊपर आसमान से संवाद, सूर्यकिरण के शौर्य को सलाम! 

नौ हॉक विमानों की गर्जना, पलक झपकते बदलती दिशाएं और तिरंगे के रंगों में रंगा आकाश. जी हां, गंगा बह रही थी। घाट अपनी जगह खड़े थे। काशी की सुबह अपने परिचित रंगों में सांस ले रही थी। तभी आसमान में एक ऐसी गर्जना गूंजी, जिसने घाटों की ओर उठती निगाहों को एक साथ ऊपर मोड़ दिया। कुछ ही क्षणों में दृश्य बदलने लगा। नौ विमान एक साथ आगे बढ़े, फिर उनके बीच ऐसा सधा हुआ तालमेल दिखाई दिया कि नजरें मानो उसी उड़ान की लय में बंध गईं। कहीं विमानों की एक साथ बढ़ती गति, कहीं दिशा में अचानक बदलाव और कहीं आसमान में बनती आकृतियां। देखते ही देखते केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं वाली लकीरों ने आकाश को तिरंगे की आभा से भर दिया। यह केवल विमानों का प्रदर्शन नहीं था। यह उस अनुशासन का दृश्य रूप था, जिसे हासिल करने में पायलटों को लंबा प्रशिक्षण, निरंतर अभ्यास और अपने साथियों पर अटूट भरोसा करना पड़ता है। इस हैरतअंगेज करतब दिखाने के बाद जब पायलटों की टीम घाट पर आई तो सीनियर रिपोर्टर सुरेश गांधी ने उनके साथ कुछ पल बिताएं बल्कि खास बातचीत में आसमान के रोमांच की कार्यप्रणाली, हर करतब के पीछे छिपी वर्षों की साधना समझी. प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंशः-

सुरेश गांधी

नीचे गंगा की धारा थी, सामने काशी की सांस्कृतिक विरासत और ऊपर भारतीय वायुसेना के सूर्यकिरण एरोबेटिक दल का कौशल। नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के हवाई प्रदर्शन ने काशी को एक ऐसा अनुभव दिया, जिसमें रोमांच था, तकनीक थी, राष्ट्रगौरव था और उन वायु योद्धाओं की मेहनत को करीब से समझने का अवसर भी, जिनकी दुनिया का बड़ा हिस्सा आसमान में गुजरता है। सूर्यकिरण टीम के पायलटों से बातचीत ने इस दृश्य के पीछे की दुनिया को समझने का रास्ता खोला। सामने लाल उड़ान पोशाक में बैठे पायलट और ऊपर आसमान में अपनी सटीकता का परिचय देते विमान—दोनों के बीच एक सीधा संबंध दिखाई देता है। जमीन पर बातचीत में जो अनुशासन और तैयारी समझ आती है, आसमान में वही कौशल उड़ान की भाषा में सामने आता है। 94 वर्षों की गौरवगाथा का उत्सव, उत्तर प्रदेश के पांच वायु योद्धाओं के लिए अपने ही प्रदेश में उड़ान का खास अहसास के बीच सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के प्रमुख ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी से खास बातचीत में बताया गया कि सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम की उड़ान का सबसे बड़ा आकर्षण है—अनेक विमानों का एक साथ, एक निश्चित क्रम और सटीक तालमेल के साथ आगे बढ़ना। 

नौ हॉक एमके-132 विमानों की फॉर्मेशन उड़ान में प्रत्येक पायलट की अपनी जिम्मेदारी होती है, लेकिन प्रदर्शन की सफलता पूरे दल के सामूहिक समन्वय पर निर्भर करती है. एक विमान की स्थिति दूसरे विमान के लिए महत्वपूर्ण होती है। गति, ऊंचाई, दिशा और दूरी के बीच संतुलन बनाए रखना पड़ता है। तेज रफ्तार में उड़ते हुए यह सुनिश्चित करना कि पूरा फॉर्मेशन निर्धारित क्रम में बना रहे, सामान्य उड़ान से कहीं अधिक एकाग्रता की मांग करता है। दर्शकों को यह दृश्य किसी सधी हुई सामूहिक प्रस्तुति जैसा दिखाई देता है। लेकिन इस प्रस्तुति का मंच कोई स्थिर धरातल नहीं, बल्कि गतिशील आसमान है। यहां प्रत्येक क्षण का महत्व है। छोटी-सी गतिविधि भी पूरे फॉर्मेशन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए पायलटों का आपसी भरोसा और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन बेहद जरूरी है। यही सूर्यकिरण की उड़ान को विशेष बनाता है। यहां किसी एक पायलट का कौशल तभी प्रभावी होता है, जब वह पूरी टीम के साथ तालमेल में हो।

सवाल: काशी के आसमान में सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन आपके लिए कितना खास है?

जवाब: काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के बीच भारतीय वायुसेना के कौशल का प्रदर्शन अपने आप में विशेष अवसर है। गंगा के ऊपर नौ विमानों की समन्वित उड़ान, उनकी सटीकता और अनुशासन वायुसेना की तैयारी और टीमवर्क का परिचय देती है।

सवाल: सूर्यकिरण टीम की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

जवाब: सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की पहचान सटीक उड़ान, अनुशासित तालमेल और कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे पर भरोसे से बनती है। आसमान में जो करतब दर्शकों को सहज और रोमांचक दिखाई देते हैं, उनके पीछे लंबा अभ्यास, बारीक योजना और पूरी टीम का सामूहिक प्रयास होता है।

सवाल: दर्शकों ने लूप, बैरल रोल और उलटी उड़ान जैसे करतब देखे। इन्हें करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है?

जवाब: हर करतब के लिए विमान की गति, ऊंचाई, दिशा और दूसरे विमानों से दूरी का सटीक आकलन जरूरी होता है। लूप में विमान ऊर्ध्वाधर वृत्ताकार पथ पूरा करता है, बैरल रोल में अपनी धुरी के चारों ओर घूमता है और इनवर्टेड फ्लाइंग में उलटी स्थिति में उड़ान भरता है। इन सभी करतबों में पायलटों के बीच निरंतर समन्वय और निर्धारित योजना का पालन महत्वपूर्ण है।

सवाल: नौ विमानों का एक साथ आकर्षक आकृतियां बनाना कैसे संभव होता है?

जवाब: इसके लिए हर पायलट को अपनी स्थिति, गति और दूसरे विमानों के सापेक्ष दूरी का लगातार ध्यान रखना पड़ता है। डीएनए जैसे समन्वित करतबों में पूरी टीम का तालमेल ही प्रदर्शन की खूबसूरती और सुरक्षा का आधार है।

सवाल: तिरंगे के रंगों में आसमान पर बनती धुएं की लकीरें क्या संदेश देती हैं?

जवाब: केसरिया, सफेद और हरे रंग की लकीरें आसमान में देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और भारतीय वायुसेना की सामूहिक क्षमता का प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत करती हैं। सूर्यकिरण का उद्देश्य दर्शकों को रोमांचित करना भर नहीं है। इसके माध्यम से युवाओं को विमानन और वायुसेना के प्रति प्रेरित करने का प्रयास भी किया जाता है। आसमान में दिखाई देने वाले करतब नई पीढ़ी को तकनीक, अनुशासन और पेशेवर दक्षता के महत्व से परिचित कराते हैं।

सवाल: भारतीय वायुसेना के 94 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस प्रदर्शन का क्या महत्व है?

जवाब: भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। उसके 94 वर्ष के सफर में तकनीक, प्रशिक्षण और परिचालन क्षमता में निरंतर विकास हुआ है। सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन इसी पेशेवर दक्षता, अनुशासन और उत्कृष्टता का सार्वजनिक परिचय है। वर्ष 2026 में वायुसेना अपनी 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर गौरवशाली सेवा यात्रा का उत्सव मना रही है।

सवाल: सूर्यकिरण टीम की स्थापना कब हुई और अब तक कितने प्रदर्शन हो चुके हैं?

जवाब: सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की स्थापना 1996 में हुई थी। यह भारत और विदेशों में विभिन्न एयर शो तथा सार्वजनिक आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती रही है। टीम अब तक 850 से अधिक प्रदर्शन कर चुकी है। टीम का प्रत्येक प्रदर्शन उसके पायलटों और सहायक दल के बीच गहन प्रशिक्षण, सावधानीपूर्वक योजना और परस्पर विश्वास का परिणाम होता है। इन दशकों में वायुसेना ने तकनीकी उन्नति, परिचालन तत्परता और व्यावसायिक दक्षता के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का विस्तार किया है। आधुनिक एयरोस्पेस शक्ति के रूप में इसका विकास केवल विमानों और उपकरणों की प्रगति की कहानी नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी विशेषज्ञता और मानव संसाधन की निरंतर तैयारी का परिणाम भी है।

सवाल: काशी के दर्शकों के लिए आपका क्या संदेश है?

जवाब: इस तरह के प्रदर्शन का उद्देश्य लोगों को भारतीय वायुसेना के कौशल, अनुशासन और तकनीकी दक्षता से परिचित कराना है। काशी जैसे ऐतिहासिक शहर में गंगा के ऊपर प्रदर्शन करना हमारे लिए गौरव का अवसर है। 'भारतीय वायुसेना प्रदर्शन 2026' इसी यात्रा को आम लोगों के सामने लाने का अवसर है। यह आयोजन वायु योद्धाओं के साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान देने के साथ नागरिकों को वायुसेना की क्षमताओं से परिचित कराता है।

टीम के प्रमुख और सदस्यों के नाम

ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी. विंग कमांडर तेजेश्वर सिंह. स्क्वाड्रन लीडर विष्णु. स्क्वाड्रन लीडर दिवाकर शर्मा. स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह. स्क्वाड्रन लीडर एडवर्ड प्रिंस. स्क्वाड्रन लीडर संजेश सिंह. स्क्वाड्रन लीडर भावेश शर्मा. स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल. स्क्वाड्रन लीडर गौरव पटेल. स्क्वाड्रन लीडर ललित वर्मा. स्क्वाड्रन लीडर विक्रम. स्क्वाड्रन लीडर तुषार शर्मा. स्क्वाड्रन लीडर शरद गोयल. फ्लाइट लेफ्टिनेंट कंवल संधू. विंग कमांडर अभिमन्यु त्यागी. विंग कमांडर श्योराण. फ्लाइट लेफ्टिनेंट मनील शर्मा.

आसमान में नौ विमान, मगर नजर आती एक ही लय

लूप से बैरल रोल तक, आसमान में रोमांच की अलग-अलग इबारत. सूर्यकिरण टीम के हवाई करतबों में तकनीकी दक्षता और पायलटों के नियंत्रण की झलक दिखाई देती है। लूप, बैरल रोल, इनवर्टेड फ्लाइंग और डीएनए जैसे करतब दर्शकों को विमानन की जटिल दुनिया से परिचित कराते हैं।

लूप—जब विमान आसमान में पूरा चक्कर लगाता है

लूप में विमान गोलाकार पथ पर ऊपर उठता है और फिर नीचे की ओर आते हुए अपनी उड़ान का निर्धारित क्रम पूरा करता है। दर्शकों के लिए यह किसी विशाल वृत्त के भीतर विमान की यात्रा जैसा दृश्य होता है। इस दौरान गति, ऊंचाई और विमान पर नियंत्रण का सटीक संतुलन जरूरी होता है।

बैरल रोल—आगे बढ़ते हुए धुरी पर घूमना

इस करतब में विमान आगे बढ़ते हुए अपनी धुरी के चारों ओर घूमता है। विमान की दिशा और स्थिति में होने वाले बदलाव के बावजूद नियंत्रित उड़ान बनाए रखना पायलट की दक्षता का परिचय देता है।

इनवर्टेड फ्लाइंग—उल्टी स्थिति में उड़ान

सामान्य उड़ान के विपरीत विमान का उल्टी स्थिति में उड़ना दर्शकों के लिए सबसे आकर्षक दृश्यों में से एक होता है। विमान की स्थिति बदलने के बाद भी उसे नियंत्रित रखना विशेष प्रशिक्षण की मांग करता है।

डीएनए—तालमेल से बनती आसमानी आकृतियां

डीएनए करतब सूर्यकिरण टीम की विशिष्ट पहचान से जुड़ा है। इसमें विमानों की समन्वित गतिविधियां आसमान में आकर्षक आकृतियों का आभास पैदा करती हैं। इस तरह की उड़ान में प्रत्येक विमान का सही समय पर अपनी स्थिति में होना महत्वपूर्ण होता है। इन करतबों का रोमांच केवल उनकी दृश्यात्मक सुंदरता में नहीं, बल्कि उस सटीकता में है, जिसके सहारे पायलट कठिन गतिविधियों को नियंत्रित ढंग से पूरा करते हैं।

करतब कुछ सेकंड के, तैयारी वर्षों की

सूर्यकिरण टीम के पायलटों से बातचीत के दौरान हवाई प्रदर्शन के पीछे की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिला। दर्शकों के सामने आसमान में जो दृश्य कुछ ही क्षणों में गुजर जाता है, उसके पीछे अभ्यास और योजना का लंबा सिलसिला होता है। एरोबेटिक प्रदर्शन में पायलट को केवल अपने विमान पर नियंत्रण नहीं रखना होता। उसे निर्धारित फॉर्मेशन, अन्य विमानों की स्थिति और सुरक्षा प्रक्रियाओं का भी ध्यान रखना पड़ता है। पूरे दल का तालमेल तभी बनता है, जब प्रत्येक सदस्य अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को पूरी तरह समझता हो। इस कार्यप्रणाली में सहायक और तकनीकी दल की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। विमान की तकनीकी स्थिति, उड़ान से पहले की तैयारियां और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन प्रदर्शन की बुनियाद हैं। सूर्यकिरण की उड़ान को देखकर यह समझना आसान है कि आसमान में सहज दिखाई देने वाली गतिविधियों के पीछे कितनी तैयारी छिपी होती है। पायलटों की एकाग्रता, तकनीकी दक्षता और टीम के दूसरे सदस्यों पर भरोसा ही प्रदर्शन को प्रभावी बनाता है। यहां साहस का अर्थ जोखिम को अनदेखा करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, अनुशासन और निर्धारित प्रक्रियाओं के सहारे कठिन परिस्थितियों में भी सटीकता बनाए रखना है।

दर्शकों की आंखों में रोमांच, मोबाइल कैमरों में काशी का आसमान

विमानों की गर्जना सुनते ही दर्शकों की निगाहें आसमान की ओर उठ गईं। जैसे-जैसे विमान करीब आते और अपनी दिशा बदलते, लोगों की उत्सुकता बढ़ती जाती। मोबाइल कैमरे इस अनुभव को सहेजने का माध्यम बन गए। कोई विमान की उड़ान रिकॉर्ड कर रहा था, तो कोई आसमान में बनती आकृतियों को अपने कैमरे में उतारने की कोशिश कर रहा था। लेकिन तेजी से बदलते दृश्यों के बीच कैमरे में सब कुछ कैद कर पाना आसान नहीं होता। एक पल विमान एक दिशा में दिखाई देता है और अगले ही पल उसकी स्थिति बदल जाती है। ऐसे में दर्शक बार-बार मोबाइल स्क्रीन से नजर हटाकर सीधे आसमान को देखने लगते हैं। गंगा के ऊपर हवाई प्रदर्शन का अपना अलग आकर्षण है। नीचे बहती नदी, घाटों की ऐतिहासिक पहचान और ऊपर आधुनिक सैन्य विमानों की गर्जना—यह दृश्य काशी के परिचित परिवेश में एक नया रोमांच जोड़ देता है। यह अनुभव दर्शकों को केवल मनोरंजन नहीं देता, बल्कि उन्हें भारतीय वायुसेना की कार्यक्षमता और पायलटों के कौशल को करीब से देखने का अवसर भी प्रदान करता है।

तिरंगे की लकीरों से सजा आकाश, लेकिन उसके पीछे है अनुशासन

केसरिया, सफेद और हरे रंगों की धुएं वाली लकीरें हवाई प्रदर्शन को दृश्यात्मक रूप से खास बनाती हैं। जब नौ विमान एक साथ निर्धारित फॉर्मेशन में आगे बढ़ते हैं और आकाश में रंगों की लकीरें उभरती हैं, तो पूरा दृश्य भारतीय तिरंगे की याद दिलाता है। लेकिन इस सुंदर दृश्य के पीछे केवल रंग और गति नहीं, बल्कि तकनीकी तैयारी और सुरक्षा का अनुशासन भी है। हवाई करतबों में मौसम, दृश्यता, विमान की तकनीकी स्थिति और निर्धारित उड़ान क्षेत्र जैसे पहलुओं का आकलन जरूरी होता है। प्रत्येक पायलट को अपने विमान की स्थिति और गति पर नियंत्रण रखने के साथ दूसरे विमानों के साथ निर्धारित दूरी और तालमेल बनाए रखना पड़ता है। इसीलिए एरोबेटिक प्रदर्शन में निरंतर अभ्यास और स्पष्ट प्रक्रियाओं का महत्व बढ़ जाता है। सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन बताता है कि किसी बड़े सामूहिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यक्तिगत प्रतिभा के साथ अनुशासन और परस्पर विश्वास भी अनिवार्य हैं।

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