राफेल की दहाड़, तेजस की उड़ान… गंगा के ऊपर भारत का
ऐलान
‘विंग्स
ओवर गंगा’ में शौर्य, साहस और तकनीक
का अद्भुत प्रदर्शन; नमो घाट से अस्सी तक उमड़ा जनसैलाब, उस पार भी लाखों निगाहें आसमान
पर
काशी के घाटों पर आस्था
का उल्लास, आसमान में भारतीय वायुसेना का पराक्रम
कहीं राफेल की गर्जना,
कहीं सुखोई की तेज रफ्तार, कहीं स्वदेशी तेजस की उड़ान तो कहीं सूर्य किरण के विमानों
की सधी हुई कलाबाजियां
गंगा की लहरों के ऊपर जब
विमानों ने अपने कौशल और समन्वय का प्रदर्शन किया, तो काशी का आसमान रोमांच, गर्व और
देशभक्ति के रंगों से भर उठा
सुरेश गांधी
सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो
गया था। समय बढ़ने के साथ घाटों पर भीड़ बढ़ती गई। बच्चों की उत्सुकता, युवाओं का रोमांच,
बुजुर्गों की निगाहों में कौतूहल और मोबाइल कैमरों में हर पल को कैद करने की होड़ ने
पूरे वातावरण को उत्सव में बदल दिया। चिलचिलाती धूप भी लोगों के उत्साह को कम नहीं
कर सकी। कई दर्शक घंटों तक अपनी जगह पर डटे रहे, ताकि आसमान में होने वाले इस अद्भुत
प्रदर्शन का कोई दृश्य छूट न जाए। उत्तर प्रदेश सरकार के स्टाम्प, न्यायालय शुल्क एवं
पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल और आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर
मिश्र ‘दयालु’ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
राफेल की गर्जना से कांपा आसमान, तेजस ने
दिखाया स्वदेशी दम
कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही लोगों की निगाहें आसमान पर टिक गईं। देखते ही देखते आधुनिक लड़ाकू विमानों की गर्जना गंगा के दोनों किनारों तक गूंजने लगी। राफेल ने अपनी तेज रफ्तार और युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया तो सुखोई-30 एमकेआई ने अपने दमदार अंदाज से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। मिराज-2000, मिग-29 और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस जैसे विमानों की मौजूदगी ने भारतीय वायुसेना की बहुआयामी क्षमता की झलक दिखाई। विमानों की सधी हुई उड़ान, निर्धारित मार्ग पर उनका सटीक संचालन और एक-दूसरे के साथ तालमेल देखकर दर्शक अभिभूत नजर आए। कभी विमान गंगा के ऊपर से गुजरते दिखाई दिए तो कभी ऊंचाई की ओर बढ़ते हुए आसमान में अपनी छाप छोड़ गए। इंजन की गूंज के बीच लोगों की तालियां और उत्साह भरे उद्घोष वातावरण में गूंजते रहे। स्वदेशी तेजस की उड़ान ने विशेष आकर्षण पैदा किया। यह प्रदर्शन केवल गति और रोमांच का दृश्य नहीं था, बल्कि भारतीय विमानन तकनीक और देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं की झलक भी था।
सूर्य किरण की कलाबाजियों ने बांधा समां
सारंग के करतब और चिनूक की ताकत ने बढ़ाया
रोमांच
फूलों की वर्षा से सजी गंगा, नमो घाट के
सामने बना मनोहारी दृश्य
एयर शो के दौरान गंगा के ऊपर फूलों की
वर्षा ने आयोजन को एक अलग ही रंग दिया। नमो घाट के सामने नदी के ऊपर गिरते फूलों की
पंखुड़ियों ने ऐसा दृश्य रचा कि लोगों की निगाहें कुछ देर के लिए आसमान से गंगा की
ओर ठहर गईं। पंखुड़ियां पानी पर बिखरती चली गईं और नदी की सतह पर फूलों की परत-सी दिखाई
देने लगी। एक ओर आधुनिक विमानों की गर्जना, दूसरी ओर गंगा पर बिखरे फूल और सामने प्राचीन
काशी के घाट। यह दृश्य इस आयोजन को सामान्य सैन्य प्रदर्शन से आगे ले गया। काशी की
सांस्कृतिक पहचान और भारतीय वायुसेना की आधुनिक शक्ति का यह मेल दर्शकों के लिए अविस्मरणीय
अनुभव बना। गंगा के दोनों किनारों पर मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद
किया। नमो घाट के सामने नदी पर उतरती पंखुड़ियों और ऊपर उड़ते विमानों का दृश्य काशी
की उस विशिष्ट पहचान को सामने लाया, जहां परंपरा और आधुनिकता एक साथ दिखाई देती हैं।
घाट-घाट पर जनसैलाब, उस पार भी टिकी रहीं
निगाहें
94 वर्षों की गौरवगाथा का आसमानी उत्सव
‘शाश्वत गंगा से अनंत आकाश तक’
एयर शो की विषयवस्तु काशी की ऐतिहासिक
और आध्यात्मिक पहचान से गहराई से जुड़ी रही। उद्घोषणा में काशी को ज्ञान, दर्शन, साधना
और भारतीय सभ्यता की जीवंत धरोहर के रूप में रेखांकित किया गया। गंगा को निरंतरता,
सांस्कृतिक विरासत और जीवन-मूल्यों का प्रतीक बताते हुए अनंत आकाश को साहस, आकांक्षा,
नवाचार और भविष्य की ऊंचाइयों से जोड़ा गया। उद्घोषकों ने कहा कि गंगा की धारा भारत
की प्राचीन सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक है, जबकि आकाश नई संभावनाओं और असीम आकांक्षाओं
का विस्तार है। इन्हीं दोनों के बीच भारतीय वायुसेना का शौर्य उस राष्ट्र की तस्वीर
प्रस्तुत करता है, जिसकी जड़ें अपनी विरासत में गहरी हैं और जिसकी दृष्टि भविष्य की
ओर है। वायुसेना का ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’—अर्थात
गौरव के साथ आकाश को छूना—भी इस प्रदर्शन की भावना से जुड़ा रहा।
विमानों की उड़ान में केवल तकनीकी कौशल नहीं, बल्कि अनुशासन, साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा
का संदेश भी दिखाई दिया।
24 और 25 अक्टूबर को भी होगा प्रदर्शन
‘विंग्स
ओवर गंगा’ के तहत 22 अक्टूबर के बाद 24 और 25 अक्टूबर को भी एयर शो
निर्धारित है। 25 अक्टूबर के मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल
होने का कार्यक्रम घोषित किया गया है। इसके मद्देनजर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां
आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने की तैयारियों में जुटी हैं। पहले दिन के प्रदर्शन
ने ही यह स्पष्ट कर दिया कि काशी के लिए यह आयोजन केवल एक सैन्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि
शहर की पहचान, देश की रक्षा क्षमता और नागरिकों के उत्साह का साझा उत्सव है। गंगा की
लहरों के ऊपर गरजते विमान और घाटों पर उमड़ा जनसमुद्र इस बात के साक्षी बने कि जब आधुनिक
भारत की शक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत के सामने प्रस्तुत होती है, तो दृश्य केवल रोमांच
का नहीं, राष्ट्रीय गौरव का भी बन जाता है। काशी ने गुरुवार को गंगा के ऊपर उड़ते विमानों
में देश का सामर्थ्य देखा। घाटों पर उमड़ा जनसैलाब इस सामर्थ्य के प्रति जनविश्वास
और उत्साह का साक्षी बना।








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