स्मार्ट मीटर के दबाव व निजीकरण के खिलाफ भड़के बिजलीकर्मी
सिगरा स्थित
अधीक्षण
अभियंता
कार्यालय
पर
जमकर
नारेबाजी,
27 नवंबर
को
प्रदेशभर
में
उग्र
प्रदर्शन
सुरेश गांधी
वाराणसी. विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले
शुक्रवार को आंदोलन के
359वें दिन बनारस के
बिजलीकर्मियों ने बिजली निजीकरण,
कारपोरेशन आदेशों के विरुद्ध संविदाकर्मियों
की अनैतिक छंटनी और समझौते के
उल्लंघन पर विभागीय अधिकारियों
द्वारा घरों पर स्मार्ट
मीटर लगाने के दबाव के
खिलाफ सिगरा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
किया। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते
हुए चेताया कि संघर्ष समिति
के साथ हुए समझौतों
को तोड़ने की किसी भी
कोशिश को बर्दाश्त नहीं
किया जाएगा। बिजलीकर्मियों ने स्पष्ट संदेश
दिया, “जब तक निजीकरण
वापस नहीं, तब तक आंदोलन
जारी रहेगा.
वक्ताओं ने कहा कि
25 जनवरी 2000 को संघर्ष समिति
और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए
समझौते में स्पष्ट रूप
से उल्लेख है कि अंतरण
योजना से पहले की
सभी कल्याणकारी योजनाएँ पूर्ववत जारी रहेंगी। इसके
बावजूद अधिकारियों द्वारा बिजलीकर्मियों के घरों पर
स्मार्ट मीटर लगाने का
दबाव बनाया जा रहा है।
कर्मचारियों ने बताया कि
साल 2005 में विद्युत नियामक
आयोग बनने के बाद
ऊर्जा प्रबंधन द्वारा एलएमवी-10 कैटेगरी समाप्त कर दी गई,
जिससे कर्मचारियों को मिलने वाली
सुविधा बंद हो गई।
अब ऊर्जा प्रबंधन ‘एनर्जी अकाउंटिंग’ की बात कर
रहा है, जबकि वर्ष
2000, 2020, 2022 और
2023 में हुए लिखित समझौतों
का लगातार उल्लंघन किया जा रहा
है। इसी कारण कर्मचारियों
का ऊर्जा प्रबंधन से विश्वास उठ
गया है।
संविदाकर्मियों की संभावित छंटनी से उबाल
संघर्ष समिति ने बताया कि
आदेश संख्या, 295 के अनुसार नगरीय
वितरण मंडल-द्वितीय में
677 कुशल व अकुशल श्रमिकों
की जरूरत है, लेकिन वर्तमान
टेंडर में केवल 489 कर्मियों
को रखने की व्यवस्था
है। इससे डेढ़ सौ
संविदा कर्मियों पर छंटनी की
तलवार लटक गई है,
जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश
है। संघर्ष समिति ने अधीक्षण अभियंता
को एक सप्ताह का
समय दिया है कि
वे संविदा कर्मियों की संख्या पुनः
बढ़ाएँ। चेतावनी दी गई कि
यदि एक भी कर्मचारी
हटाया गया तो पूरे
मंडल के बिजलीकर्मी संघर्ष
समिति के नेतृत्व में
कठोर आंदोलन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी
विभागीय अधिकारियों की होगी।
किसी भी कर्मचारी के घर मीटर लगाने गए तो होगा भारी विरोध
वक्ताओं ने साफ कहा
कि संघर्ष समिति से हुए समझौते
का उल्लंघन कर यदि किसी
बिजली कर्मचारी के घर स्मार्ट
मीटर लगाने की कोशिश की
गई, तो संबंधित टीम
को कड़े विरोध का
सामना करना पड़ेगा। संविदा
कर्मियों और कैश काउंटर
ऑपरेटरों को हटाने की
किसी भी कार्रवाई पर
संघर्ष समिति प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए बाध्य
होगी।
27 नवंबर को देशव्यापी समर्थन के साथ बड़ा प्रदर्शन
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने
कहा कि पूर्वांचल व
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के
विरोध में पिछले एक
साल से चल रहा
आंदोलन अब राष्ट्रव्यापी समर्थन
प्राप्त कर चुका है।
देशभर के बिजलीकर्मी कई
बार उत्तर प्रदेश के आंदोलन के
समर्थन में एकजुट हुए
हैं. उन्होंने घोषणा की कि 27 नवंबर
को पूरे उत्तर प्रदेश
में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। बिजलीकर्मियों,
संविदाकर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने
संकल्प दोहराया कि निजीकरण वापस
लेने और आंदोलन के
दौरान की गई सभी
उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को रद्द करने
तक संघर्ष जारी रहेगा। विरोध
सभा को आर.के.
वाही, ई. मायाशंकर तिवारी,
ई. एस.के. सिंह,
ओ.पी. सिंह, संदीप
कुमार, राजेश सिंह, जयप्रकाश, हेमंत श्रीवास्तव, मनोज जैसवाल, मनोज
यादव, ई. नवदीप सैनी,
रजनीश श्रीवास्तव, उदयभान दुबे, रंजीत पटेल सहित अन्य
नेताओं ने संबोधित किया।



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