गंगा किनारे फिर सजी रोशनी की अद्भुत महफ़िल, काशी विश्वनाथ घाट पर लेज़र शो की दमदार वापसी
बाढ़ में
डूबे
उपकरणों
को
तकनीकी
कौशल
से
मिला
नया
जीवन
गंगा आरती
के
बाद
रोज़
गूंजेगा
काशी
का
गौरव
देश के
सर्वश्रेष्ठ
लेज़र
शो
का
खिताब
पा
चुका
है
यह
आयोजन
सुरेश गांधी
वाराणसी। आस्था और आधुनिकता के
अद्भुत संगम की नगरी
काशी में एक बार
फिर रोशनी, ध्वनि और संस्कृति का
मोहक उत्सव जीवंत हो उठा है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
के गंगा घाट पर
बहुप्रतीक्षित लेज़र शो का पुनः
शुभारंभ हो गया है।
देश के सर्वश्रेष्ठ लेज़र
शो का अवॉर्ड प्राप्त
कर चुका यह भव्य
आयोजन अब फिर से
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के
आकर्षण का केंद्र बन
गया है।
इस लेज़र शो में ललिता घाट और काशी के गौरवपूर्ण इतिहास को अत्यंत कलात्मक और मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
प्रकाश और ध्वनि के समन्वय से सजी यह प्रस्तुति काशी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर देती है, जिससे दर्शक भावविभोर हो उठते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष गंगा के जलस्तर में अचानक आई वृद्धि के कारण लेज़र शो के उपकरण पूरी तरह जलमग्न हो गए थे।
मशीनों में
सिल्ट भर जाने से
वे निष्क्रिय हो गई थीं
और शो को बंद
करना पड़ा था। महीनों
तक पानी में डूबे
इन उपकरणों को फिर से
चालू करना किसी चुनौती
से कम नहीं था।
लेकिन श्री काशी विश्वनाथ
मंदिर न्यास ने हार नहीं
मानी। मुंबई से विशेषज्ञ तकनीशियन
टीम को बुलाकर और
विभिन्न संस्थानों के सहयोग से
इस जटिल कार्य को
सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
तकनीकी दक्षता और प्रतिबद्धता का
यह उदाहरण अब रंग लाता
दिखाई दे रहा है।
अब यह लेज़र शो
पहले की तरह पूरी
गुणवत्ता और भव्यता के
साथ प्रस्तुत किया जा रहा
है। खास बात यह
है कि मंदिर घाट
पर पहले से शुरू
हो चुकी सायंकालीन गंगा
आरती के बाद प्रतिदिन
इस शो का आयोजन
किया जाएगा। लगभग 10 मिनट की यह
प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता के
साथ-साथ आधुनिक तकनीक
का अद्भुत अनुभव कराती है।
लेज़र शो के पुनः शुरू होने से काशी विश्वनाथ घाट की रौनक और बढ़ गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस आकर्षक दृश्य का आनंद लेने पहुंच रहे हैं। उपस्थित लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की और इसे काशी के पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाला कदम बताया।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा निरंतर किए जा रहे नवाचार यह स्पष्ट करते हैं कि धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक सुविधाओं का संतुलन बनाते हुए श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। अब गंगा किनारे यह रोशनी का उत्सव न केवल आस्था को आलोकित करेगा, बल्कि काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी नई चमक देगा।


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