गंगा चढ़ी, दिल धड़का : काशी में फिर 1978 जैसी तबाही का खौफ
घाटों की
सीढ़ियां
डूब
गईं,
अब
बस्ती
की
बारी
है...
तटीय
इलाकों
में
दहशत
का
माहौल
गंगा का
जलस्तर
72 मीटर
पार,
प्रशासन
हाई
अलर्ट
पर
प्रशासन अलर्ट
मोड
में,
नावें
और
राहत
टीमें
तैयार
नदी नहीं
रही
शांत,
गंगा
की
लहरों
में
दिखा
बाढ़
का
संकेत
: विश्वंभरनाथ
मिश्र
सुरेश गांधी
वाराणसी. गंगा एक बार फिर अपने रौद्र रूप में है। गंगा की लहरों में इन दिनों श्रद्धा नहीं, सिहरन दिख रही है। सोमवार को गंगा ने राजघाट गेज पर 72.04 मीटर का जलस्तर पार कर लिया। यह खतरे के निशान 71.262 मीटर से 78 सेमी ऊपर है और जलस्तर हर घंटे 0.5 सेमी की गति से बढ़ रहा है। गंगा की चढ़ती लहरों ने लोगों को 1978 की बाढ़ की खौफनाक यादें फिर से ताजा कर दी हैं। नक्खीघाट निवासी 72 वर्षीय राजेंद्र मल्लाह बताते हैं, “ऐसा उफान हमने तब देखा था जब 1978 में हमारी नावें भी छतों से बांधनी पड़ी थीं। अब फिर वही डर लग रहा है। घाट की अंतिम सीढ़ी भी डूब चुकी है। अस्सी घाट पर सब्जी बेचने वाली श्यामा देवी कहती हैं, रोज़ी-रोटी घाट से ही जुड़ी है। अब पानी दुकान तक आ गया है, ऊपर चबूतरे पर बैठकर भगवान से प्रार्थना कर रही हूं कि इस बार बाढ़ घर न डुबाए।
जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने बताया, गंगा का जलस्तर खतरे के ऊपर है, लेकिन फिलहाल नियंत्रित गति से बढ़ रहा है। एसडीआरएफ, जल पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीमें तैनात की गई हैं। तटीय इलाकों में चौकसी बढ़ाई गई है। नगर आयुक्त ने बताया कि निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी है। राहत शिविरों के लिए स्कूल भवनों को चिह्नित कर लिया गया है। संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर महज़ एक नदी की बात नहीं, बल्कि पूरे शहर की सांसों से जुड़ा सवाल बन गया है।श्रावण की श्रद्धा पर संकट की छाया
बनारस के घाटों पर फिर बह रही चिंता की धारा
गंगा आरती, बाबा विश्वनाथ के दर्शन और कांवड़ यात्रा के
बीच गंगा की चढ़ती लहरों ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा के मद्देनज़र कई घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है और आवाजाही सीमित की गई है।जनता से प्रशासन की अपील
घाट किनारे न जाएं, बच्चों को नदी से दूर रखें. अफवाहों से बचें, प्रशासनिक सूचना पर भरोसा करें. किसी भी आपात स्थिति में 1077 (आपदा नियंत्रण कक्ष) या नजदीकी पुलिस स्टेशन पर संपर्क करें.
तबाही की ओर इशारा करती लहरें
प्रशासन हाई अलर्ट पर, बचाव टीमें सक्रिय
तटीय बस्तियों में पसरा है डर का सन्नाटा
राहत में कोताही बर्दाश्त नहीं, हर ज़रूरतमंद
तक पहुँचे सहायता : सुरेश खन्ना
वाराणसी।
गंगा के बढ़ते जलस्तर
और बाढ़ से प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लेने सोमवार को प्रदेश के वित्त एवं
संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद वाराणसी के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने तूफानी दौरा
किया। मंत्री ने नमो घाट से लेकर नक्की घाट तक निरीक्षण करते हुए राहत शिविरों में
पहुँचकर बाढ़ पीड़ितों से सीधे संवाद किया और सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन
दिया। प्रभारी मंत्री ने राहत कार्यों में जुटे प्रशासनिक अमले को स्पष्ट निर्देश दिए
कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत शिविरों
में साफ-सफाई, पेयजल, भोजन, चिकित्सा और बिजली जैसी सभी जरूरी सुविधाएं सतत और सुचारु
रूप से उपलब्ध हों।
राहत शिविर में वितरित
की गई सहायता सामग्री
सहयोग में जुटा पूरा
प्रशासनिक अमला
इस दौरान प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, मेयर अशोक तिवारी और जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार समेत कई जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी भी साथ रहे। मंत्री ने मौके पर मौजूद स्वास्थ्य टीमों को जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए.
वाराणसी में बाढ़ और
बारिश के कारण 12वीं तक के सभी स्कूल बंद
जिले में गंगा और वरुणा नदियों में बढ़ते
जलस्तर और लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए, जिला प्रशासन
ने जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को 5 और 6 अगस्त को बंद रखने का आदेश जारी
किया गया है।जिला विद्यालय निरीक्षक भोलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह आदेश बेसिक
शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, सीबीएसई बोर्ड, आईसीएसई और संस्कृत बोर्ड से
मान्यता प्राप्त सभी विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक
की सभी कक्षाएं इन दो दिनों के लिए स्थगित रहेंगी। सभी विद्यालय संचालकों और प्रधानाचार्यों
को इस आदेश का कड़ाई से पालन करने के लिए कहा गया है।








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