बार-बार ब्लीडिंग : शरीर दे रहा है खतरे का इशारा?
महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं ऐसी हैं, जो चुपचाप शरीर के भीतर पनपती रहती हैं और जब तक ध्यान दिया जाए, तब तक वे गंभीर रूप ले सकती हैं। अनियमित ब्लीडिंग भी ऐसी ही एक समस्या है, जिसे अक्सर महिलाएं सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। कभी पीरियड के बीच में खून आना, कभी ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग होना, ये सभी संकेत शरीर की अंदरूनी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। डा. विभा मिश्रा का मानना है कि अनियमित ब्लीडिंग हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं। इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन, खून की कमी (एनीमिया), गर्भाशय में फाइब्रॉइड (गांठ) या गर्भनिरोधक उपायों का प्रभाव जैसे कारण हो सकते हैं। आज की बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और नींद की कमी, इन समस्याओं को और बढ़ा रही है। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने शरीर के संकेतों को समझें और समय रहते सही कदम उठाएं
सुरेश गांधी
फिरहाल, अनियमित ब्लीडिंग, यानी पीरियड के
तय समय के अलावा
खून आना. सामान्य से
ज्यादा या कम ब्लीडिंग
होना. लंबे समय तक
स्पॉटिंग बने रहना. यह
केवल एक लक्षण है,
बीमारी नहीं, लेकिन यह किसी अंदरूनी
समस्या की ओर संकेत
जरूर करता है. इसकी
पहली बड़ी वजह हार्मोनल
असंतुलन : महिलाओं के शरीर में
एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन
पीरियड को नियंत्रित करते
हैं। जब इनका संतुलन
बिगड़ता है : पीरियड अनियमित
हो जाते हैं, ब्लीडिंग
बढ़ या घट सकती
है. इसके पीछे बड़ी
वजह : तनाव, नींद की कमी,
अनियमित जीवनशैली. दुसरा खून की कमी
(एनीमिया) : नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत
में 50 फीसदी से अधिक महिलाएं
एनीमिया से प्रभावित हैं।
एनीमिया होने पर : शरीर
कमजोर हो जाता है.
ब्लीडिंग ज्यादा महसूस होती है. और
यह एक चक्र बन
जाता है, ब्लीडिंग से
खून कम, और खून
कम होने से समस्या
और बढ़ती है.
कब हो सकती है चिंता की बात?
इन लक्षणों को हल्के में न लें : हर 15 से 20 दिन में ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा रक्तस्राव, खून के थक्के आना, लगातार कमजोरी और चक्कर. यह संकेत हो सकते हैं कि शरीर को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. इसके इलाज के लिएघबराहट नहीं, सही प्रक्रिया जरूरी है. अनियमित ब्लीडिंग का इलाज चरणबद्ध तरीके से किया जाता है : सही जांच (अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट), दवा (हार्मोनल संतुलन के लिए). पोषण सुधार (आयरन, संतुलित आहार). नियमित फॉलो-अप. अधिकतर मामलों में यही उपाय काफी होते हैं.
आयरन युक्त भोजन
(पालक, चुकंदर, अनार), नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना,
समय-समय पर स्वास्थ्य
जांच.
महिलाओं के लिए जरूरी संदेश
अपने शरीर के
संकेतों को समझें, समस्या
को नजरअंदाज न करें, समय
पर डॉक्टर से सलाह लें,
बिना जानकारी के किसी भी
निष्कर्ष पर न पहुंचें.
मतलब साफ है अनियमित
ब्लीडिंग कोई ऐसी समस्या
नहीं है जिससे डरकर
चुप बैठा जाए, और
न ही इसे इतना
हल्का समझा जाए कि
नजरअंदाज कर दिया जाए।
यह शरीर का एक
संकेत है, जो हमें
अपनी सेहत पर ध्यान
देने के लिए प्रेरित
करता है। सही समय
पर जांच, संतुलित जीवनशैली और जागरूकता, यही
इस समस्या से बचने और
इसे नियंत्रित करने का सबसे
प्रभावी तरीका है।
हार्मोनल संतुलन का महत्व
फिरहाल इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने
के लिए वरिष्ठ रिपोर्टर
सुरेश गांधी ने वाराणसी की
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.
विभा मिश्रा से विस्तार से
बातचीत की। प्रस्तुत है
इस महत्वपूर्ण संवाद के प्रमुख अंश
:-
डॉ.
विभा
मिश्रा
: बिल्कुल, यह समस्या तेजी
से बढ़ रही है।
इसके पीछे सबसे बड़ा
कारण हार्मोनल असंतुलन है। आज की
जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान, नींद की कमी,
इन सभी का सीधा
असर हार्मोन पर पड़ता है।
इसके अलावा फाइब्रॉइड, थायरॉइड की समस्या और
खून की कमी (एनीमिया)
भी महत्वपूर्ण कारण हैं।
सवाल
: फाइब्रॉइड
को
लेकर
महिलाओं
में
काफी
डर
रहता
है।
क्या
हर
गांठ
खतरनाक
होती
है?
जवाब
: नहीं, बिल्कुल नहीं। फाइब्रॉइड एक गैर-कैंसर
( बीनाइन यानी ट्यूमर कोशिकाओं
की एक असामान्य वृद्धि
है जो शरीर के
अन्य भागों में नहीं फैलती
(मेटास्टेसिस नहीं करती) और
न ही आसपास के
ऊतकों पर आक्रमण करती
है। ये आमतौर पर
धीमी गति से बढ़ते
हैं, जानलेवा नहीं होते, और
सर्जरी द्वारा हटाए जाने पर
दोबारा नहीं आते। हालांकि,
अगर ये नसों या
रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालते
हैं, तो दर्द या
असुविधा का कारण बन
सकते हैं। ये शरीर
में कहीं भी हो
सकते हैं, जैसे स्तन,
दिमाग, त्वचा, गर्भाशय (फाइब्रॉएड), या वसा ऊतक
(लाइपोमा)। इसके कारण
अक्सर अज्ञात होते हैं, लेकिन
आनुवंशिकी, तनाव, सूजन, या आहार से
संबंधित हो सकते हैं।
लक्षण : कई बार कोई
लक्षण नहीं होते, लेकिन
आकार बड़ा होने पर
अंगों पर दबाव के
कारण दर्द या कार्यप्रणाली
में बाधा आ सकती
है। यदि आवश्यक हो,
तो उन्हें सर्जरी द्वारा हटाया जा सकता है.
लगभग 60 से 70 फीसदी महिलाओं में यह किसी
न किसी समय पाई
जाती है। अधिकतर मामलों
में यह छोटी होती
है और कोई नुकसान
नहीं करती। समस्या तब होती है
जब इसका आकार बड़ा
हो या यह ज्यादा
ब्लीडिंग कराए।
सवाल
: क्या
हर
फाइब्रॉइड
का
इलाज
ऑपरेशन
ही
है?
जवाब
: यह एक बहुत बड़ा
भ्रम है। 70 से 80 फीसदी मामलों में दवा और
निगरानी से ही समस्या
नियंत्रित हो जाती है।
ऑपरेशन तभी किया जाता
है जब : बहुत ज्यादा
ब्लीडिंग हो, फाइब्रॉइड बड़ा
हो, दवा से आराम
न मिले.
सवाल
: आजकल
गर्भनिरोधक
के
लिए
आईयूसीडी
का
इस्तेमाल
बढ़ा
है,
जैसे
मीरेना।
क्या
इससे
भी
ब्लीडिंग
की
समस्या
हो
सकती
है?
जवाब
: हाँ, कुछ मामलों में
ऐसा देखा गया है।
मीरेना एक अच्छा और
सुरक्षित विकल्प है, लेकिन हर
महिला के शरीर की
प्रतिक्रिया अलग होती है।
कुछ महिलाओं में शुरुआत में
या लंबे समय बाद
: अनियमित ब्लीडिंग, स्पॉटिंग हो सकती है।
ऐसे मामलों में डॉक्टर से
परामर्श लेकर इसे हटाने
या दवा से नियंत्रण
करने का विकल्प अपनाया
जाता है।
सवाल
: डॉक्टर,
एक
गंभीर
सवाल,
क्या
आजकल
जल्दी-जल्दी
ऑपरेशन
की
सलाह
दी
जा
रही
है?
जवाब
: कुछ मामलों में ऐसा देखने
को मिलता है, खासकर जहां
मरीज को पूरी जानकारी
नहीं दी जाती। हर
मरीज का केस अलग
होता है. इसलिए डटेप
बाई स्टेप ट्रीटमेंट जरुरी है. पहले दवा,
फिर निगरानी, और आखिर में
सर्जरी.
सवाल
: ओवरी
हटाने
को
लेकर
भी
डर
है।
क्या
यह
सही
है
कि
बिना
जरूरत
के
इसे
हटाना
नुकसानदायक
हो
सकता
है?
जवाब
: बिल्कुल सही। ओवरी शरीर
का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा
है। यह हार्मोन बनाती
है, जो पूरे शरीर
को प्रभावित करते हैं. अगर
बिना जरूरत के ओवरी हटा
दी जाए : तो समय
से पहले मेनोपॉज, हड्डियों
की कमजोरी, मानसिक और शारीरिक बदलाव
होने लगता है. इसलिए
यह निर्णय बहुत सोच-समझकर
लेना चाहिए।
सवाल
: सरकारी
आंकड़े
बताते
हैं
कि
भारत
में
बड़ी
संख्या
में
महिलाएं
एनीमिया
से
ग्रस्त
हैं।
क्या
इसका
भी
ब्लीडिंग
से
संबंध
है?
जवाब
: जी हाँ, बहुत गहरा
संबंध है। नेशनल फेमिली
हेल्थ सर्वे के अनुसार 57 फीसदी
महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।
एनीमिया होने पर : शरीर
कमजोर होता है. ब्लीडिंग
ज्यादा महसूस होती है. इसलिए
इलाज में आयरन और
पोषण बहुत जरूरी है।
सवाल
: महिलाओं
को
कब
तुरंत
डॉक्टर
के
पास
जाना
चाहिए?
जवाब
: जब, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग
हो, बार-बार अनियमित
पीरियड, चक्कर, कमजोरी, पेट में लगातार
दर्द. ऐसे लक्षणों को
नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सवाल
: अंत
में,
महिलाओं
के
लिए
आपका
क्या
संदेश
है?
जवाब
: अपने शरीर को समझें.
किसी भी सलाह को
बिना समझे न मानें.
दूसरी राय जरूर लें,
और सबसे जरूरी, “हर
समस्या का समाधान ऑपरेशन
नहीं होता.”
डॉ. विभा मिश्रा के साथ हुई यह बातचीत स्पष्ट करती है कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जितनी आम हैं, उतना ही जरूरी है उनके प्रति सही दृष्टिकोण। अनियमित ब्लीडिंग और फाइब्रॉइड जैसी समस्याओं में डर या जल्दबाजी की जगह समझ, संवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। ऑपरेशन अंतिम विकल्प है, पहला नहीं, जागरूकता ही सबसे बड़ा उपचार है.





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