‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और महिलाओं के उत्पीड़न
के आरोपों की एसआईटी जांच की मांग, डीएम को सौंपा ज्ञापन
हिंदू जनजागृति समिति ने
डीएम के जरिए मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजा पत्र
बहुराष्ट्रीय कंपनियों
में धार्मिक दबाव और भेदभाव का मुद्दा उठाया
सुरेश गांधी
वाराणसी। शहर में बुधवार को एक अहम सामाजिक मुद्दे
को लेकर हलचल तब बढ़ गई, जब हिंदू जनजागृति समिति ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय महिला आयोग को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। वाराणसी
व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बहुराष्ट्रीय
कंपनियों में कार्यरत हिंदू महिलाओं के साथ कथित उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और भेदभाव के
गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ज्ञापन के अनुसार, महाराष्ट्र के नासिक
स्थित एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हिंदू महिला कर्मचारियों की शिकायतों
के आधार पर यह मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से सुनियोजित तरीके
से महिलाओं को निशाना बनाते हुए उनके साथ यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण का दबाव, मांसाहार
के लिए मजबूर करना तथा धार्मिक गतिविधियों के लिए बाध्य करने जैसी घटनाएं सामने आई
हैं। समिति के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा ने
इन घटनाओं को “संगठित कॉर्पोरेट जिहाद” का स्वरूप बताते हुए राज्य की सभी आईटी
और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विशेष सुरक्षा और धार्मिक भेदभाव विरोधी ऑडिट कराने की
मांग की है। उनका कहना है कि यह ज्ञापन न केवल कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और
धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को उजागर करता है, बल्कि डिजिटल युग में युवाओं के सामने
खड़ी नई चुनौतियों की ओर भी संकेत करता है। अब प्रशासन और संबंधित संस्थाओं के रुख पर
सबकी नजरें टिकी हैं।
प्रमुख मांगें
1.
एसआईटी जांच की मांग : पूरे
मामले की जांच राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीइाईडी) के अनुभवी अधिकारियों की विशेष
जांच टीम (एसआईटी) से कराने की मांग की गई है। जांच का दायरा केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित
न रखकर ‘लव जिहाद’, ‘धार्मिक आतंक’
और संगठित कॉर्पोरेट अपराध तक बढ़ाने की बात कही गई है।
2.
भर्ती प्रक्रिया की जांच : सभी
कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया (रिक्वायरमेंट) की जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि
कहीं किसी विशेष समुदाय को प्राथमिकता देकर सुनियोजित तरीके से हिंदू महिलाओं को निशाना
तो नहीं बनाया जा रहा।
3.
आईसीसी और प्रबंधन पर कार्रवाई : जिन
कंपनियों ने अपनी आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को निष्क्रिय रखा या शिकायतों को दबाया,
उनके सीईओ और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के खिलाफ ‘क्रिमिनल नेग्लिजेंस’
के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
4.
राष्ट्रीय महिला आयोग का हस्तक्षेप : राष्ट्रीय
महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) से इस मामले में स्वतः संज्ञान (सो काल फार मोटो) लेने और
देशभर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए नई ‘कंप्लायंस गाइडलाइंस’
जारी करने की अपील की गई है।
वाराणसी में व्यापक समर्थन
इस दौरान वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष
अजीत सिंह बग्गा, महामंत्री कवींद्र जायसवाल, चौसरिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील
चौसरिया सहित कई सामाजिक और अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने इस मुद्दे
को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
डिजिटल व्यसन पर भी उठी आवाज
ज्ञापन में विद्यार्थियों में बढ़ती ‘डिजिटल
लत’ (डिजिटल एडिक्शन) को भी गंभीर समस्या बताते हुए उत्तर प्रदेश
में ‘स्क्रीन टाइम पॉलिसी’ लागू करने की मांग की गई है। समिति का
कहना है कि मोबाइल और इंटरनेट के अत्यधिक उपयोग से बच्चों के मानसिक और शैक्षिक विकास
पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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