Friday, 1 May 2026

सारनाथ में शांति का महासंगम : बुद्ध पूर्णिमा पर उमड़ा जनसैलाब, करुणा का संदेश बना वैश्विक स्वर

सारनाथ में शांति का महासंगम : बुद्ध पूर्णिमा पर उमड़ा जनसैलाब, करुणा का संदेश बना वैश्विक स्वर 

एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए पवित्र अवशेषों के दर्शन

बच्चों नेविश्व शांतिपर रची सृजनात्मक अभिव्यक्ति 

धम्म, ध्यान और संवाद से गूंजा सारनाथ

सुरेश गांधी  

वाराणसी. बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ ने एक बार फिर विश्व को शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश दिया। भगवान गौतम बुद्ध की 2570वीं जयंती पर आयोजित भव्यबौद्ध महोत्सवश्रद्धा, संस्कृति और ज्ञान का विराट उत्सव बनकर उभरा, जहां देश-विदेश से आए एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की गहराइयों में डूबकर पवित्र अस्थि धातुओं के दर्शन किए।

मूलगंध कुटी विहार में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही नजर आईं। हर चेहरे पर आस्था की चमक और मन में शांति की तलाश स्पष्ट थी। दर्शन के साथ ही यह स्थल ध्यान, धम्म और आत्मचिंतन का केंद्र बन गया, जहां हर आगंतुक मानो बुद्ध के उपदेशों को भीतर आत्मसात करने की कोशिश करता दिखा।

कार्यक्रम का बौद्धिक और सृजनात्मक पक्ष भी उतना ही सशक्त रहा।विश्व शांति के लिए तथागत बुद्धविषय पर आयोजित निबंध, चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी कल्पनाशीलता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। रंगों और शब्दों के माध्यम से बच्चों ने एक ऐसे विश्व की तस्वीर उकेरी, जहां करुणा, सहिष्णुता और अहिंसा सर्वोपरि हों। विजेताओं को सम्मानित करते हुए आयोजकों ने नई पीढ़ी में बौद्ध चिंतन के बीज बोने का प्रयास किया।

महोत्सव के दौरान धम्म देशना, विपश्यना और विचार-विमर्श सत्रों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की। विद्वानों और भिक्षुओं ने बुद्ध के उपदेशों को केवल शास्त्रों तक सीमित रखकर उन्हें जीवन में उतारने की आवश्यकता पर बल दिया। यह संवाद केवल धर्म का नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य का विमर्श बन गया। इस अवसर पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ और अन्य संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को वैश्विक आयाम प्रदान किया। विशिष्ट अतिथियों और विद्वानों की उपस्थिति ने इसे ज्ञान-संवाद का मंच बना दिया, जहां परंपरा और आधुनिकता का संतुलित संगम देखने को मिला।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता को दिशा देने वाला दिवस है। उन्होंने बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओंजन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाणका उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिन हमें आत्मबोध और वैश्विक शांति की ओर प्रेरित करता है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन समाज में सहिष्णुता और जागरूकता को सशक्त करते हैं।

कार्यक्रम के एक अन्य आयाम में केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के शान्तरक्षित ग्रंथालय परिसर में आयोजित संगोष्ठी और शोध पत्रिकाधीके 66वें अंक का विमोचन भी शामिल रहा। यहां विद्वानों ने बौद्ध दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे, जो इस आयोजन को केवल उत्सव नहीं, बल्कि बौद्धिक चेतना का केंद्र बना गया। सारनाथ में बुद्ध पूर्णिमा का यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस शाश्वत संदेश की पुनर्पुष्टि हैजहां हिंसा के शोर के बीच शांति की धीमी परंतु स्थायी आवाज ही मानवता का सच्चा मार्ग बनती है।

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