फिर चढ़ने लगी गंगा, बारिश ने बढ़ाई काशी की चिंता
69.44 मीटर पहुंचा
जलस्तर,
4
सेंटीमीटर
प्रतिघंटे
की
रफ्तार
से
बढ़ाव;
घंटेभर
की
मूसलाधार
बारिश
से
सड़कें
बनीं
झील
सुरेश गांधी
वाराणसी। गंगा का जलस्तर
एक बार फिर काशी
की चिंता बढ़ाने लगा है। केंद्रीय
जल आयोग के राजघाट
गेज पर रविवार 6
बजे गंगा का जलस्तर
69.44 मीटर दर्ज हुआ, जो
चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से अभी
नीचे है, लेकिन नदी
4 सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से
बढ़ रही है। लगातार
बढ़ते जलस्तर के बीच रविवार
को करीब एक घंटे
हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की
मुश्किल और बढ़ा दी।
कई इलाकों में सड़कें जलभराव
से झील जैसी नजर
आईं और सामान्य आवागमन
प्रभावित हुआ। हाल के
दिनों में बारिश के
बाद काशी के कई
हिस्सों में जलभराव की
समस्या सामने आती रही है।
गंगा का यह बढ़ाव ऐसे समय में हुआ है जब तटवर्ती और निचले इलाकों में पहले से सतर्कता बढ़ाई गई है। प्रशासन ने संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव तंत्र को सक्रिय रखा है। वरुणा तटवर्ती क्षेत्रों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है।
फिलहाल गंगा खतरे के निशान 71.262 मीटर से 1.902 मीटर नीचे है, लेकिन बढ़ने की रफ्तार ने प्रशासन के साथ तटवर्ती बस्तियों की बेचैनी बढ़ा दी है।मौसम विभाग ने भी वाराणसी में अगले दिनों बारिश की संभावना जताई है और 31 अगस्त व एक सितंबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान दिया है।
प्रशासन का
जोर अब नदी के
जलस्तर के साथ बारिश
से पैदा होने वाले
शहरी जलभराव पर भी है।
संदेश साफ है—नदी
का पानी अभी खतरे
के निशान से नीचे है,
लेकिन बढ़ती रफ्तार और बारिश दोनों
को हल्के में लेने का
समय नहीं।
बाढ़ से निपटने को प्रशासन तैयार
61 राहत
शिविर—भोजन, पेयजल, प्रकाश, बिस्तर और स्वच्छता की
व्यवस्था।
198 नावें—रेस्क्यू
और राहत सामग्री पहुंचाने
के लिए तैयार।
24 घंटे
बाढ़ नियंत्रण कक्ष—सूचना मिलते
ही संबंधित विभागों को सक्रिय करने
की व्यवस्था।
NDRF, जल पुलिस
व PAC—आपात स्थिति में
तत्काल रेस्क्यू के लिए तैयार।
कम्युनिटी
किचन—राहत शिविरों में
तीन समय भोजन की
व्यवस्था।
चिकित्सा
टीमें—दवाएं, प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं
उपलब्ध कराने की तैयारी।
पशुधन
सुरक्षा—भूसा, उपचार, टीकाकरण और सुरक्षित स्थान
पर पहुंचाने की व्यवस्था।
राहत
किट—विस्थापित परिवारों के लिए आवश्यक
दैनिक उपयोग की सामग्री तैयार।
बहु-विभागीय समन्वय—राजस्व, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य,
पशुपालन, बिजली, जलकल व पीडब्ल्यूडी
को अलर्ट।
दिशा-निर्देश—नदी, नालों, तेज बहाव और जलभराव वाले स्थानों पर जाने से बचें; आपात स्थिति में प्रशासन को सूचना दें।





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