Sunday, 11 October 2026

मंदिरों में जयकारे, घरों में कलश; शक्ति की भक्ति में काशी

मंदिरों में जयकारे, घरों में कलश; शक्ति की भक्ति में काशी 

शारदीय नवरात्र का उल्लास, मां शैलपुत्री के दरबार में उमड़ी भीड़; दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं को करना पड़ा लंबा इंतजार

जयकारों से गूंज उठी काशी; घर-घर कलश स्थापना के साथ शक्ति आराधना का शुभारंभ

सुरेश गांधी

वाराणसी। भोर की पहली किरण के साथ ही धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी मां आदिशक्ति की आराधना में डूब गई। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को देवी मंदिरों में श्रद्धा का ऐसा ज्वार उमड़ा कि मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा। अलईपुर स्थित मां शैलपुत्री के प्राचीन मंदिर में भोर से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई और मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। मां की एक झलक पाने के लिए किसी के हाथ में लाल चुनरी थी तो कोई फूल-माला और नारियल लेकर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा था। प्रतीक्षा लंबी थी, लेकिन आस्था अडिग। हर जुबां पर मां का जयकारा और हर मन में सुख-समृद्धि की कामना थी।

नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री के दर्शन के साथ काशी में नौ दिनों तक चलने वाली शक्ति उपासना का विधिवत आगाज हुआ। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र घंट-घड़ियाल की ध्वनि तथा देवी के जयकारों से भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की खुशहाली, आरोग्य और जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना की। मान्यता है कि नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना से साधना का शुभारंभ होता है और भक्त नौ दिनों तक चलने वाले व्रत-पूजन का संकल्प लेते हैं। 

दर्शन की आस में घंटों कतार में खड़े रहे भक्त

अलईपुर स्थित मां शैलपुत्री मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही बढ़ने लगी थी। दर्शन के लिए मंदिर के बाहर लंबी कतार लगी रही। भीड़ का आलम यह था कि श्रद्धालुओं को अपनी बारी आने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। स्थानीय समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, कतार करीब एक किलोमीटर तक पहुंच गई थी। मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन शुरू हुआ तो भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। दूर-दराज के इलाकों से भी लोग मां के दरबार में पहुंचे।

लंबे इंतजार के बावजूद भक्तों की आस्था में कमी नहीं दिखी। कोई हाथ जोड़कर मां का ध्यान करता रहा तो कोई मन ही मन देवी मंत्रों का जाप करता रहा। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ पहुंचे परिवारों के लिए दर्शन की प्रतीक्षा धैर्य की परीक्षा भी बनी। जैसे-जैसे भक्त गर्भगृह के निकट पहुंचते, मां के दर्शन की उत्सुकता बढ़ती जाती। कुछ क्षणों के दर्शन के बाद श्रद्धालु प्रसाद लेकर बाहर निकलते और दूसरे भक्तों को रास्ता देते दिखाई दिए।

मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि काशी की धार्मिक परंपराएं केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं। यहां आस्था पीढ़ियों से चली आ रही जीवनशैली का हिस्सा है। नवरात्र का पहला दिन आते ही घरों से लेकर मंदिरों तक शक्ति की उपासना का एक साझा संसार आकार लेने लगता है।

घर-घर विराजीं मां, कलश स्थापना के साथ शुरू हुई साधना

मंदिरों में दर्शन के साथ ही घरों में भी नवरात्र की शुरुआत पूरे विधि-विधान से हुई। श्रद्धालुओं ने शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया। पूजा स्थलों की साफ-सफाई के बाद चौकी सजाई गई, मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच घटस्थापना की गई। कई घरों में जौ बोकर नौ दिनों की पूजा का संकल्प लिया गया। दीप प्रज्ज्वलित कर परिवार के सदस्यों ने मां की आरती उतारी और सुख-समृद्धि की कामना की।

कलश स्थापना को नवरात्र साधना का महत्वपूर्ण आरंभ माना जाता है। कलश में जल भरकर, आम्रपल्लव और नारियल स्थापित करने की परंपरा के साथ श्रद्धालु घर में देवी शक्ति का आह्वान करते हैं। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा, मंत्र-जाप और आरती का क्रम शुरू हुआ। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने फलाहार के साथ नौ दिनों की साधना का संकल्प लिया।

घरों में सुबह से ही पूजा की तैयारियां चलती रहीं। कहीं महिलाएं पूजन सामग्री सहेजती दिखीं तो कहीं बच्चे पूजा की चौकी सजाने में परिवार की मदद करते नजर आए। मंदिरों में सामूहिक आस्था का दृश्य था तो घरों में पारिवारिक श्रद्धा का संसार। दोनों का भाव एक ही था—मां का आगमन हो, जीवन में शक्ति का संचार हो और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहे।

शक्ति की उपासना का पहला सोपान हैं मां शैलपुत्री

नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। उनका वाहन वृषभ है और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे में कमल सुशोभित रहता है। धार्मिक मान्यता में उनका स्वरूप धैर्य, दृढ़ता, पवित्रता और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्र का पहला दिन साधना की नींव रखने का अवसर है। मां शैलपुत्री की आराधना के साथ भक्त अपने भीतर साहस, संयम और संकल्प को जागृत करने की कामना करते हैं। पर्व का संदेश केवल देवी के समक्ष शीश झुकाने तक सीमित नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने से भी जुड़ा है।

काशी में नवरात्र का यह आगाज मंदिरों की घंटियों, घरों में गूंजती आरती और मां के जयकारों के बीच हुआ। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन मां के एक स्वरूप की आराधना होगी। पहले दिन की भक्ति ने वातावरण को जिस श्रद्धा और उल्लास से भर दिया, उससे स्पष्ट है कि शक्ति उपासना का यह पर्व काशी की सांस्कृतिक चेतना में गहराई से रचा-बसा है।

आस्था के साथ व्यवस्था की कसौटी भी

मां के दरबार में उमड़ी भीड़ श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमाण है, लेकिन यह प्रशासनिक तैयारियों की परीक्षा भी है। लंबी कतारों के बीच बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुविधा, पेयजल, चिकित्सा सहायता, सुरक्षित आवागमन और भीड़ के सुचारु प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। दर्शन की प्रतीक्षा श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा का हिस्सा हो सकती है, लेकिन व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि यह प्रतीक्षा अनावश्यक परेशानी में न बदले।

नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए मंदिरों के आसपास यातायात नियंत्रण, सुरक्षा निगरानी और कतार प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाते हैं। भक्तों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ मंदिरों की धार्मिक गरिमा बनाए रखना भी आवश्यक है। शारदीय नवरात्र का पहला दिन काशी के लिए आस्था, परंपरा और सामूहिक उत्सव का दिन बना। अलईपुर के शैलपुत्री मंदिर में दर्शन की प्रतीक्षा करते श्रद्धालु हों या अपने घरों में कलश स्थापित कर पूजा में लीन परिवार—हर जगह एक ही भाव दिखाई दिया। मां के प्रति समर्पण, मन में मंगल की कामना और जीवन में शक्ति के संचार की आकांक्षा। नवरात्र का संदेश यही है—आस्था मन को संबल दे, साधना जीवन को अनुशासित करे और शक्ति की आराधना समाज में सद्भाव, करुणा तथा सकारात्मकता का प्रकाश फैलाए।

No comments:

Post a Comment

मंदिरों में जयकारे, घरों में कलश; शक्ति की भक्ति में काशी

मंदिरों में जयकारे , घरों में कलश ; शक्ति की भक्ति में काशी  शारदीय नवरात्र का उल्लास , मां शैलपुत्री के दरबार में उमड़ी ...