जन-विश्वास की कसौटी पर खरा उतरना ही पुलिस की असली जिम्मेदारी – मोहित अग्रवाल
वाराणसी पुलिस
आयुक्त
की
सख्त
हिदायतें,
गंभीर
अपराधों
पर
शून्य
सहिष्णुता
सुरेश गांधी
वाराणसी. पुलिस कमिश्नरेट में शनिवार को आयोजित राजपत्रित अधिकारियों की गोष्ठी में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने जो निर्देश दिए, वे न केवल पुलिस व्यवस्था की दिशा तय करते हैं, बल्कि आम जनता के विश्वास को मजबूत करने वाले भी हैं। उन्होंने साफ कहा कि “पारदर्शिता, संवेदनशीलता और त्वरित निस्तारण ही पुलिस की कार्यकुशलता की पहचान है।” गोष्ठी में दिए गए निर्देश दर्शाते हैं कि पुलिस आयुक्त वाराणसी सिर्फ अपराध पर अंकुश ही नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और पुलिस की पारदर्शी छवि को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि इन निर्देशों का पालन कठोरता और ईमानदारी से हो, तो निश्चित ही काशी की पुलिस व्यवस्था अन्य शहरों के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकती है।
आयुक्त ने स्पष्ट किया
कि IGRS प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध निस्तारण
किया जाए और शिकायतकर्ता
से अनिवार्य रूप से फीडबैक
लिया जाए। यह कदम
न सिर्फ पारदर्शिता लाएगा बल्कि पीड़ित को यह भरोसा
भी देगा कि उसकी
समस्या को गंभीरता से
सुना और सुलझाया जा
रहा है। गो–तस्करी, महिला उत्पीड़न, एनडीपीएस एक्ट और एससी–एसटी से जुड़े
मामलों को प्राथमिकता देने
का निर्देश पुलिस आयुक्त की उस सोच
को दर्शाता है, जिसमें कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय
की मजबूती निहित है। इन मामलों
में ढिलाई से पुलिस की
छवि पर प्रश्नचिह्न लग
सकता है, जिसे रोकना
आवश्यक है।
महिला सुरक्षा पर विशेष बल
महिला अपराधों के संदर्भ में
उपनिरीक्षक स्तर तक के
अधिकारियों को संवेदनशील बनाने
हेतु प्रशिक्षण व सैनेटाइजेशन कराने
का निर्देश अत्यंत सार्थक है। धर्म परिवर्तन,
बच्चा गुमशुदगी और महिला अपराधों
में शिथिलता न बरतने की
हिदायत इस बात का
प्रमाण है कि पुलिस
आयुक्त महिला सुरक्षा के मुद्दे पर
किसी भी तरह का
समझौता नहीं चाहते।
यातायात की नब्ज पर नजर
वाराणसी जैसे तीर्थनगरी में
बढ़ते यातायात दबाव पर उन्होंने
पुलिस उपायुक्त यातायात को आदेश दिया
कि वे पीक आवर्स
में स्वयं जामग्रस्त इलाकों में मौजूद रहें
और प्रबंधन की निगरानी करें।
यह निर्देश सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि
सड़क पर उतरकर समाधान
देने की कार्यसंस्कृति की
ओर इशारा करता है।


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