यूके में भारतीय कालीन-टेक्सटाइल की गूंज
वस्त्र मंत्रालय
और
कलीन
निर्यात
परिषद
का
प्रतिनिधिमंडल,
भारत–ब्रिटेन
मुक्त
व्यापार
समझौते
से
बढ़ेंगी
निर्यात
संभावनाएं
सुरेश गांधी
वाराणसी. भारतीय वस्त्र और हस्तनिर्मित कालीनों को वैश्विक बाजार में नई ऊंचाई देने के लिए भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वस्त्र मंत्रालय ने कलीन निर्यात संवर्धन परिषद और अन्य प्रमुख निर्यात परिषदों के सहयोग से ब्रिटेन के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वस्त्र सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने किया।
लंदन में आयोजित
विशेष संगोष्ठी “भारत – हस्तशिल्प, कालीन और हैंडलूम की
खरीद का लाभकारी गंतव्य”
में भारत के विविध
वस्त्र और कालीन उद्योग
की ताकत को अंतरराष्ट्रीय
खरीदारों के सामने रखा
गया। भारत के ब्रिटेन
में उच्चायुक्त विक्रम के. डोराइसवामी भी
इस अवसर पर मौजूद
रहे। संगोष्ठी में ब्रिटेन के
व्यापारिक जगत को हाल
ही में संपन्न भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते से उत्पन्न नए
अवसरों का लाभ उठाने
का आमंत्रण दिया गया।
कलीन निर्यात संवर्धन
परिषद के अध्यक्ष कुलदीप
आर. वट्टल ने कहा कि
भारतीय हस्तनिर्मित कालीन अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला,
गुणवत्ता और पर्यावरण-अनुकूल
उत्पादन के लिए विश्वभर
में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ब्रिटेन
के खरीदारों को 49वें इंडिया
कारपेट एक्सपो में शामिल होने
का निमंत्रण दिया, जो 11 से 14 अक्टूबर 2025 तक कारपेट एक्सपो
मार्ट, भदोही में आयोजित होगा।
यह मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर कालीन और फर्श सजावट
के प्रमुख स्रोत मंच के रूप
में जाना जाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने उच्चायुक्त डोराइसवामी
से भेंट कर भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन
पर जोर दिया, ताकि
ब्रिटेन के आयातकों को
शुल्क लाभ मिल सके
और भारतीय निर्यातक वहां के बाजार
में अपनी स्थिति और
अधिक मजबूत कर सकें।वस्त्र मंत्रालय
और कलीन निर्यात संवर्धन
परिषद की यह पहल
इस बात का प्रमाण
है कि भारत सरकार
वैश्विक स्तर पर भारतीय
वस्त्र और कालीन उद्योग
को नई गति देने
के लिए प्रतिबद्ध है।
यह प्रयास न केवल भारतीय
शिल्प और परंपरा को
अंतरराष्ट्रीय पहचान देगा, बल्कि ब्रिटेन के खरीदारों के
लिए भी भारतीय उत्पादों
को लाभकारी स्रोत के रूप में
स्थापित करेगा।


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